एक अनुबंधित शिक्षिका के बपौती रौब ने समूचे माहौल को गंदा कर डाला

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4दास्तां कस्तुरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय ओरमांझी की

मुकेश भारतीय

रांची। आज कस्तुरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय ओरमांझी में उत्पन्न नारकीय एवं गंभीर हालात को लेकर झारखंड शिक्षा परियोजना विभाग के एक बड़े अधिकारी से बात हो रही थी। सम्पूर्ण बातचीत का निचोड़ यह रहा कि एक शिक्षिका की बपौती रौब ने यहां सब गुड़ गोबर कर रखा है।

यह शिक्षिका पहले वार्डन भी रही है। खुद के पिता को विजलेंस डीएसपी बताकर बीईईओ तक के नाक पर चढ़ी रहती है। सारे शिक्षक और छात्राएं भी इससे भयभीत रहते हैं। वह एक लंबे अरसे से आम शिक्षिका भले ही हो लेकिन बाद के जितने भी वार्डन हुए या वर्तमान में है, उसके ईशारों पर ही नाचते हैं।

बात चाहे साथी शिक्षकों की हो या एकाउंटेंट, डे नाईट गार्ड की। सबको उसने अपने तिलिस्म से वित्तीय व शासकीय अनियमियताओं में इस कदर उलझा रखी है कि कोई उह-चू नहीं कर पाते हैं। जांच हुई तो विद्यालय भवन के एक कमरे में बैठ कर प्रखंड की शिक्षा व्यवस्था संभाल रही शिक्षा प्रसार पदाधिकारी भी चपेट में आ जाएगी।

इस अनुबंधित शिक्षिका को षडयंत्र रच किसी को भी पानी पिलाने में महारत हासिल है। कहा जाता है कि पूर्व के एक एकाउंट के विरुद्ध कुछ इस कदर अमानवीय षडयंत्र रचा कि शिक्षा परियोजना के अधिकारी को न चाहते हुए भी उसे विद्यालय से दूसरे विद्यालय में चलता करना पड़ा। क्योंकि उस वक्त महौल ही कुछ ऐसा खड़ा कर दिया था। उस एकांटेंट पर विद्यालय की छात्रा के साथ अवैध संबंध बता कर आसपास के लोगों को ईकठ्ठा कर लिया गया और ठीक उसी समय सीधे परियोजना के अधिकारियों को सूचित कर दिया गया। विद्यालय की आगे अधिक बदनामी होती, इसके पहले ही एकांटेंट को रातोरात हटा दिया गया।

इसके पहले कस्तुरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय ओरमांझी बाजार के समीप  संचालित थी। वहां भी इस शिक्षिका के षडयंत्र से कई गंभीर घटनाएं हुई। रात अंधेरे युवकों का बालिका आवासीय विद्यालय में आना जाना लगा रहता था। इसके विरोध में स्थानीय लोग आक्रोशित हो रहे थे। उक्त शिक्षिका के खिलाफ आक्रोश गंभीर मोड़ लेता कि इसके पहले ही एक नया षडयंत्र रचा गया। कुछ छात्राओं को लेकर यह शोर फैला दिया गया कि उस विद्यालय भवन में भूत रहता है और परिसर में रहने वालों को जान का खतरा है। 21वीं सदी के इस वैज्ञानिक दौर में मीडिया में भी काफी सुर्खियां लगाई गई और ऐसा माहौल बना दिया गया कि शिक्षा परियोजना एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों को तत्काल विद्यालय को चकला मध्य विद्यालय परिसर अवस्थित प्रखंड संसाधन केन्द्र भवन के संकुचित कमरों में शिफ्ट कराना पड़ा।

बहरहाल, इस शिक्षिका को कस्तुरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय ओरमांझी से कहीं अन्यत्र स्थातंरित कर माहौल और व्यवस्था को सुधारने की बाबत झारखंड शिक्षा परियोजना के एक सक्षम पदाधिकारी ने चौकांने वाली बात कही। इस पदाधिकारी का कहना था कि सब कुछ जानते-समझते हुए भी उसे यहां से नहीं हटा सकते क्योंकि, अभी वह यहां हैं तो इस विद्यालय का महौल खराब कर रखी है। इसे जहां भी भेजा जाएगा, उस विद्यालय के अच्छे माहौल को भी गंदा कर डालेगी।

यदि एक सड़ी मछली सारे तालाब को गंदा कर देती है औऱ उसे दूसरे तालाब में फेंकने बजाय निकाल बाहर फेंकने की कार्रवाई क्यों नहीं की जाती ? इस सबाल पर शिक्षा परियोजना के पदाधिकारी मिल बैठ कर समस्या का निराकरण करने की बात कह चुप्पी साध लते हैं।

बहरहाल, अब देखना है कि झारखंड शिक्षा परियोजना के अधिकारियों की नजर में बनी इस गंदी मछली का कोई ईलाज किया जाता है या फिर वह फिर कोई षडंयंत्र के तहत नया गुल खिला जाती है।

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