उपेक्षित है नेताजी से जुड़े झरिया कोयलाचंल का यह विरासत

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neta ji

‘तुम मुझे खून दो मैं तुझे आजादी दूगां’ नारे को अजांम तक पहुंचाने वाले भारत मां के वीर सपूत नेताजी सुभाष चंद्र बोस का झरिया कोयलाचंल से गहरा नाता रहा है।

आजादी की लड़ाई के दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस कई दफा झारखंड का झरिया कोयलाचंल के विभिन्न क्षेत्रों में न केवल आये, बल्कि मजदूरों के साथ बैठकें भी कीं।

दरअसल धनबाद के बरारी कोक प्लांट में नेताजी के एक रिश्तेदार अभियंता पद पर कार्यरत थे। अपने महत्वपूर्ण अभियान पर भारत छोड़ने से पूर्व गोमो स्टेशन जाने के लिए जिस कार का इस्तेमाल नेताजी ने किया था, वह आज भी धरोहर के रूप में कोयलांचल में मौजूद है।

हालांकि यह बात और है कि इसके रख-रखाव की उचित व्यवस्था नहीं की गयी है। बीसीसीएल के धनबाद स्थित गेस्ट हाउस परिसर में उक्त कार आज भी देखी जा सकती है।

पूर्व में जब बीसीसीएल निर्देशक के पद पर टीके लोहिड़ी थे, तो उन्होंने इस अमूल्य धरोहर के बेहतर रख-रखाव करने की व्यवस्था की घोषणा की थी। लेकिन निर्देशक पद से उनकी सेवानिवृत के बाद यह योजना ठंढे बस्ते में चली गयी।

यह बात काफी महत्वपूर्ण है कि एक तरफ प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नेताजी से जुड़ी महत्वपूर्ण रिपोर्ट की फाइलें सार्वजनिक कीं।

वहीं धनबाद में नेताजी की इस एकमात्र स्मृति की ओर सरकार और बीसीसीएल प्रबधंन का ध्यान नहीं गया है। गोमो स्टेशन का नाम आज भले ही नेताजी के नाम से सर्वविदित है, पर झरिया कोयलांचल के जिस जोरापोखर क्षेत्र के अपने सहयोगी रुनू सेन के आवास में वह ठहरते थे, कि ओर किसी का ध्यान नहीं है।

झरिया का तिलक भवन आज भी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की स्मृति को संजोये हुए है। यहां नेताजी क्रांतिकारियों के साथ गुप्त बैठकें करते थे।

झरिया का राज ग्राउंड भले ही आज सिमट गया है, लेकिन इस स्थल पर कभी नेताजी ने ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन को संबोधित किया था। इधर झरिया भागा रोड में नेताजी की प्रतिमा स्थापित की गयी है।

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