ई राजनीति में पुत्र मोह जे न करावे

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मुकेश भारतीय

राजनीति में तो कब्र की दहलीज पर भी वह करा जाती है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।अब देखिये न। उतराखंड के बाबा भाजपा में शामिल हो गये हैं। उन्हें उनके डीएनए टेस्ट पास शहजादे साहेब शाह जी के दरबार में खींच ले गये हैं। 
सतकीय उम्र की दहलीज की ओर बढ़ रहे ये बाबा दो राज्यों उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड के कांग्रेसी मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री तथा आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रह चुके हैं।  हालांकि बाबा महामहिम का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाये। उन्हें बीच में ही बहुचर्चित सेक्स स्कैंडल के उपले की वजह से पद त्यागना पड़ा था।

जरा याद कीजिये। वही शहजादे साहेब हैं, जिन्हें बाबा ने 3 साल पहले काफी फजीहत और 6 साल की कानूनी डीएनए मिलान के बाद अपना लहु अंगीकार किया था।

ऐसे बाबा को भाजपा में लाने के पीछे उत्तराखंड में पंडित वोटों का मजबूत जुगाड़ बताया जा रहा है लेकिन वहां अगले माह जो आम विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, उस पहाड़ी हल्के के पार्टी पहले से ही विद्रोह की चपेट में है। इसका मूल कारण यह है कि  भाजपा ने प्रथम चरण के दंगल में 15 से उपर ऐसे सूरमाओं को मैदान में उतारा है, जो नवांतुक हैं।  

बाबा कल तक कांग्रेस के दुलरुआ माने जाते रहे हैं। 90 के दशक में उन्होंने साथी दिग्गज अर्जुन सिंह के साथ खुद की पार्टी बना ली थी लेकिन सोनिया जी की पार्टी कमान संभालते हीं हृदय परिवर्तन हो गया।

अब देखना है कि पुत्र मोह बस बाबा का एक बार फिर आया हृदय परिवर्तन क्या उमस बिखेरती है। कहते हैं कि बाबा के शहजादे को यह प्रेरणा रामबिलास-चिराग से मिली है। रामबिलास भाजपा के घोर विरोधी थे और उन्हें भी चिराग लालू सरीखे सखा से खींचते-खांचते मोदी-शाह जी की शरण में लेकर चले गये। तब दोनों पिता-पुत्र मैदान मारने में कामयाब रहे। अब बाबा और शहजादे साहेब चुनावी रेस में कितना आगे भाग पाते हैं, यह राम जाने।

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