ई रांची के एसएसपी में कौन सा सुर्खाब के पंख लगे हैं ?

Share Button

jain_murderवेशक आज समूचा  झारखंड प्रदेश भयाक्रांत है। जंगली हिस्सों में जहां उग्रवादियों का राज कायम है तो वहीं शहरी हलकों में अपराधियों का सिक्का चल रहा है। उसके सामने सरकारी विकास या हथियार का खौप कोई मायने नहीं रखते। इसका एक बड़ा कारण है राज्य के पुलिस-तंत्र की अकर्मण्यता और लापरवाही। यह तंत्र कहीं भी आम लोगों तो दूर खास व्यवसायी लोगों की हिफाजत करने से मीलों दूर नज़र आती है।

राजधानी रांची की कानून व्यवस्था तो और भी लच्चर है।  विगत 14 फरवरी को कारखाने से घर वापस लौटने के दौरान अपहृत हुए व्यवसायी ज्ञान चंद्र जैन का शव करीब एक सप्ताह बाद वरामद होने की घटना ने तो लोगों का नींद-चैन सब छीन लिया है। जैन का शव रांची के कुल्ली जंगल से बरामद किया गया है।  70 वर्षीय जैन रांची से 25 किलोमीटर दूर रातू के सिमलिया में टायर रिसाइक्लिंग का कारखाना चलाते थे। 

इस घटना का सबसे दुःखद पहलु यह भी है कि समूचा पुलिस महकमा व्यवसायी जैन को शव बरामद होने तक जिंदा और अपहर्ताओं को लोकेशन में होने के दावे कर रही थी।

सच पुछिये तो, अभी जो माहौल कायम है, उसमें कब किसका अपहरण कर लिया जायेगा। उसकी हत्या कर दी जायेगी। उसका घर-बार लूट लिया जायेगा। कुछ भी कहना मुश्किल है। यदि लोग जीते दिख रहे हैं तो सिर्फ राम भरोसे। पुलिस महकमे के लोग हर जगह वसूली करते दिखते हैं या या जमीनादि दलाली। ऐसी बातें सरेआम झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष एवं रांची विधायक सी.पी.सिंह कह चुके हैं। उस वक्त उन्हीं की पार्टी के मुंडा सरकार सत्तासीन थी।

हाल के दिनों में हुई कुछ घटनाओं को लेकर यह माहौल कोई एक दिन में नहीं बनी है। यह बात दीगर है कि रांची के वर्तमान एसएसपी  के कार्यकाल में स्थिति और  गंभीर ही हुई है। इनकी काली उपलब्धियों में कई ऐसे कारनामें गवाह हैं, जो इस बात पर साफ बल देती है कि इनकी जांच कार्रवाईयों से दबंगों और अपराधियों का ही हौसला बढ़ा है। सदैव छद्म मीडिया से घिरे रहना और न्यूज़ चैनलों- अखबारों  में अपना चेहरा चमकाना ही इनके फर्ज़ रह गये हैं। 

इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता है कि भाजपा नीत मुंडा-राज में राजधानी रांची में बिल्डरों-जमीन माफियाओं की पहल पर पुलिस तंत्र में निकम्मे लोगों को ठूंस कर रख दिया गया और अच्छे कर्मियों को संटिंग में डाल दिया गया। 

वर्तमान एसएसपी को पूर्व  एसएसपी के स्थान पर  मुंडा सरकार ने  इसलिये नहीं बैठाया था कि उन्हें राजधानी की विधि व्यवस्था को लेकर चिंता थी। पूर्व एसएसपी को इसलिये हटाया गया था कि उनके नाम की चर्चा से आम जन से करोड़ों की ठगी के मामले की उच्चस्तरीय जांच झेल रही एक बिल्डकॉन कंपनी को लेकर सरकार की किरकीरी हो रही थी। अब उस वक्त एक सिंह को हटा कर दूसरे सिंह को  शहर का पुलिस कप्तान बनाने के पीछे कौन सी लॉबी काम कर रही थी ? इस बात की चर्चा  खुद पुलिस महकमे में ही सरेआम होती है। इस संदर्भ में जन-चर्चा की बात तो इतर है। 

 पूर्व एसएसपी के साथ वर्तमान एसएसपी के कार्यकाल का आंकलन करने से स्पष्ट है कि इस महोदय में भी कोई सुर्खाब के पंख नहीं लगे हैं। राजधानी रांची के भीतर हाल की घटनाओं के मद्देनजर राष्ट्रपति शासन में पुलिस-तंत्र में व्यापक बदलाव किये वगैर लोगों में सुरक्षा की किरण फुटने का सबाल ही नहीं उठता। अब देखना है कि राज्यपाल के वरिष्ठ सलाहकार के.विजय कुमार पूर्व के भाजपा नीत अर्जुन मुंडा के रचे पुलिस-तंत्र को कैसे चुस्त करते हैं।

…………… मुकेश भारतीय

 

Share Button

Relate Newss:

टीवी रिपोर्टर देता है सीएम को गाली
झारखंड में JJA की आवाज- नीतीश होश में आओ, पत्रकारों का दमन स्वीकार्य नहीं
भाजपाई मंत्री 'बाटुल' की साख पर बट्टा
ये वन-कोयला नहीं, वन-घोटाला है मौनी बाबा !
रजरप्पाः मां छिन्नमस्तिके की एक दुर्लभ चित्र
आप भी कर सकते हैं गूगल ऐडसेंस से मोटी कमाई!
`विश्‍वरुपम` को सराह रहे हैं यूपी के लोग
भाजपा की नैतिक जिम्मेवारी
अधिकतर महिलाओं से होता है भेदभाव
“टंच माल” , दिग्विजय सिंह और मीडिया
यही है ''कुंडा का गुंडा''
अंतरिम रेल बजट-2014: न किराया बढ़ेगा, न घटेगा
न्यूज़ कवरेज करने गए रिपोर्टर पर हमला, कैमरा तोड़ा
कोल माफिया मनोज को अर्जुन मुंडा की खुली पनाह
हैदराबाद ब्लास्टः आरोपी मंजर इमाम रांची से गिरफ्तार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...
loading...