‘इस महापाप में न्यायपालिका, विधायिका, कार्यपालिका, मीडिया,एनजीओ सब शरीक’

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राजनामा.कॉम। फिलहाल कशिश न्यूज चैनल से जुड़े जाने-माने टीवी जर्नलिस्ट संतोष सिंह ने मीडिया को पटना हाई कोर्ट से मिले आदेश को लेकर अपने फेसबुक वाल पर जो उद्गार व्यक्त किया है, वह सीधे तौर पर वाक्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मौलिक अधिकार की ओर ध्यान आकृष्ट करता है।

टीवी जर्नलिस्ट संतोष सिंह ने लिखा है कि पटना हाईकोर्ट के निर्देश को लेकर लगातार फोन आ रहा है इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए, किसी का सलाह है कि आप लोगों के यूनियन कि और से हाईकोर्ट में याचिका दायर करिए दो सौ से अधिक वकील दस्तख्त करने को तैयार है।

कुछ उत्साहित मित्र तो यहां तक पहुंच गये हैं कि प्रभात भूषण से बात हो गयी है इंदिरा जय सिंह से बात करने कि कोशिश कर रहे हैं चलिए इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट चलते हैं।

मुजफ्फरपुर बालिका रेप मामले में पहले दिन से ही चीख चीख कर कह रहा हूं। इस कृत्य में न्यायपालिका, विधायिक, कार्यपालिका, मीडिया,एनजीओं सब शामिल है।

इसलिए ये लड़ाई बहुत आसान नहीं है। फिर ये व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। ये लड़ाई आम जनता कि है उन्हें तय करना है कि इस लड़ाई को कैसे अंजाम तक पहुंचाया जाये।

भारत के संविधान के आत्मा (मूल ढांचे )को कोई बदल नहीं सकता है। सुप्रीम कोर्ट के 13 जज का ये संयुक्त फैसला है। केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य केस में आ चुकी है और आज भी इसी फैसले के आधार पर भारतीय लोकतंत्र चल रहा है।

जब विधायिका को संविधान के मूल स्वरुप को बदलने का अधिकार नहीं है तो कोर्ट को ये अधिकार किसने दे दिया कि भारतीय संविधान के आत्मा को मार दे। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार इसी तरह खबर को रोकने को लेकर गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को पूरी तौर पर मना कर दिया कि ये मैं नहीं कर सकता। इसलिए निश्चित रहिए जैसे ही मुजफ्फरपुर बालिका रेप मामले में लगेगा कि ये सारे लोग मिल कर घालमेल कर रहे फिर देख लिजिएगा चाल मेरी।

खबरे चलेगी और खूब चलेगी जेल जाना पड़ेगा स्वीकार है, लेकिन न्याय के इस लड़ाई को यू ही बेपटरी नहीं होने दिया जायेगा साहब को मीडिया से ही डर लगता है।

31 मई को एफआईआर दर्ज हुआ। दो माह तक सब चुप रहे औऱ मीडिया चिल्लता रहा। आज जो नसियत दे रहे हैं क्यों नहीं सोमोटो संज्ञाण ले लिए थे। ,जबकि इस तरह के बालिका गृह कि सीधी जिम्मेवारी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के तीन-तीन सीनियर जज को दिया हुआ है।

सरकार तो हाईकोर्ट में यहां तक कह दिया था कि इस राज्य के जितने भी अराजक तत्व हैं वहीं चाहते हैं कि सीबीआई जांच हो। लेकिन अगली ही तारीख में सरकार खुद सीबीआई जांच हो। इसके लिए कोर्ट के सामने आवेदन दिया और हाई कोर्ट खुद इस केस का मोनेटरिंग करे ये भी आग्रह किया।

सरकार के रुख में ये बदलाव बिना किसी दबाव का हुआ था उस वक्त भी मीडिया ही अकेले चीख रह था। बाकी सबके सब तमाशबीन बना हुए थे और आज नसीहत दे रहे हैं।

सोमवार को सुनवाई है खबर चलेगी। सीबीआई को स्टेटस रिपोर्ट सौंपनी है। साथ ही एसपी का तबादला क्यों किया, इस पर सीबीआई अपनी सफाई देगी। साहब ये बिहार है। सबको पता है। कहां से क्या खेल हो रहा है। विश्वास भरोसा तो आपका खतरे में हैं।

टीवी जर्नलिस्ट संतोष कुमार के उपरोक्त पोस्ट पर महत्वपूर्ण टिप्पणियों का दौर भी जारी है….

Arvind Shesh मीडिया में खबर नहीं आई होती, खासतौर पर आपने नहीं हिम्मत की होती तो इस मामले को जिंदा दफ्न कर दिया गया होता! बच्चियों की पृष्ठभूमि जो है, उनमें तो उन सबको मार डाला जाता शायद जिन्होंने मुंह खोला है!

Rajesh Raj राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पहल पर सर्वोदय ग्राम, कन्हौली में तत्कालीन कांग्रेसियों द्वारा 1946 में स्थापित सार्वजनिक प्राकृतिक चिकित्सा गृह को मुजफ्फरपुर बालिका गृह का मास्टर माइंड ब्रजेश ठाकुर पर एक नए आरोप से उसकी मुश्किलें बढ़ने वाली हैं…दरअसल ब्रजेश ठाकुर प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र को अपने NGO के लिए लेने की कोशिश की थी…जिसमें वो वृद्धाश्रम केंद्र खोलना चाहता था…हालाकि प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र की कमेटी ने उसका प्रस्ताव पास नहीं किया था। प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र को आर्थिक तंगी से गुजर रहा है..ब्रजेश ऐसे ही भवनों और उसकी जमीन को निशाना बनाता था
गौर करने वाली बात है की प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र के सचिव बिहार सरकार के मंत्री सुरेश शर्मा हैं। जाँच का बिषय है की जो फंड आ रहा है उस फंड का बंटाधार कही कागजो पर ही तो नहीं हो रहा है इसमें ब्रजेश ठाकुर और सुरेश शर्मा के बिच कोई साजिश तो नहीं हो रही थी संस्थान को हड़पने का।

 Ashok Anurag कुछ ख़ास व्यक्तियों के लिये कितना सब कुछ ख़ास हो जाता है, और साधारण जनता पिसती कुचलती तड़पती भावना के साथ बस 5 साल फिर 5 साल फिर से 5 साल और झमकू काका, सुरसतिया चाची, जामुन दादा मर खप जाते हैं इंसाफ़ की उम्मीद में, इसलिये जागिये ये आग आपके घर भी पहुँच सकती है, संतोष जी काँटों से भरे झुरमुट से आपने राह निकाल ली है, बधाई आप अकेले नहीं हैं, ये कारवां अभी और बड़ा होगा, शुभकामनाएं

Prem Kumar Founder Pyf यह मामला को लीपापोती का षड्यंत्र है जरूर सर्वोच्च न्यायालय में जाना चाहिए।

Yuvarishi Gopal Krishna सर पता है की इसकी अगर कलई खुली तो सारे तोप नंगे हो जाएँगे, तभी लिपा पोती हो रही है।

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