इस तरह बनाए जा रहे हैं रिपोर्टर- पत्रकार

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पिछले साल रांची के एक दैनिक अखबार के दफ्तर में बैठा था। धनबाद ईलाके से उस अखबार के लिए रिपोर्टर बनने के लिए 2 युवक आए थे। एक बीजेएमसी के साथ कई नामी गिरामी अखबार में प्रकाशित रिपोर्टों की कतरनें साथ लाया था। उसकी लेखन और रुचि में दम दिख रहा था। दूसरे युवक के पास न तो पत्रकारिता की डीग्री थी और न कोई अनुभव। उसकी लिखावट पर भी बंग्ला का असर था। वह इंटर में हीं लटक गया था।
pressकुछ समय बाद पता चला कि अखबार के नामचीन संपादक और फ्रेंचाईजी मालिक ने मिल कर दूसरे युवक को धनबाद का ब्यूरो प्रमुख बना दिया। उत्सुकता वश मुझसे रहा न गया और नीचे एक चाय दुकान पर अपनी ढींगें हांक रहे उस युवक से ब्यूरो चीफ बनने का राज पूछ लिया। उस युवक ने कहा- सर, संपादक ने जब मालिक के सामने धनबाद से रिटर्न मिलने की बात कही तो साफ कह दिया कि हर साल मैं 6 लाख रुपया लाकर दूंगा। चाहे वह विज्ञापन के रुप में हो या जेब से। मेरा वहां कोयला, होटल और शराब आदि का कारोबार है। इतनी राशि तो पर साल ऐसे भी पुलिस-पत्रकार-नेता आदि को देना ही पड़ता है। इससे वेहतर है कि वह एक पत्रकार के रुप में अखबार को दे और व्यवस्था में शान से जीए और अपना काला कारोबार बढ़ाए। पत्रकारों की टोली के साथ उसका उठना बैठना होगा तो पुलिस-नेता लेगें थोड़े। उल्टे देगें।
अब पहले युवक की कहानी देखिए। उसने अपने कैरियर और अनुभव का हवाला देकर दो वक्त की रोटी का मानदेय अखबार से ही मांग लिया सब कुछ मिलाकर 4000 रुपए प्रति माह।
यह सब लिखने का मेरा आशय बस इतना है कि आप खुद आंकल कर सकें कि पत्रकारिता में कैसे लोग घुस रहे हैं और घुसाए जा रहे हैं। कमोवेश छोटे-बड़े सभी मीडिया हाउसों का यही हाल है।

गिरावट हर तरफ आई है। इससे मीडिया भी अछुती नहीं है। कारण है कि पत्रकारिता में गिरे हुए लोग तेजी से घुस रहे हैं। उनका काम व्यवस्था में मुंह मारना है। प्रखंड स्तर से अनुमंडल, जिला,प्रमंडल या फिर राज्य स्तर पर प्रायः रिपोर्टरों का आंकलन कीजिए…आपको साफ हो जाएगा कि इनका सामाजिक व्यवहार पुलिस, नेता, अधिकारी से अलग नहीं है।

दूसरे अर्थों में कहिए तो सब एक गिरोह बना कर आम नागरिक को लूट रहे हैं। उनका शोषण-दमन कर रहे हैं। ऐसे लोगों को बेनकाब करना हम सब की जिम्मेवारी है। आईये साथ चलें। अपने आसपास के रिपोर्टरों-पत्रकारों या रिपोर्टर-पत्रकार का तमगा लगाए लोगों पर नजर रखें। उनकी काली करतूतों की जानकारी सोशल मीडिया में डाले। हमें भेजें। हम अपनी वेबसाइटों के माध्यम से उसे वेनकाब करेगें। लोगो को सचेत करेगें। ……. मुकेश भारतीय अपने फेसबुक वााल पर।

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