इस अवैध कारोबार के खिलाफ क्यों नहीं हुई कार्रवाई

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लोग कहते हैं कि आखिर सहारा, PACL  ,सारदा, प्रयाग, रोज वैली आदि जैसे नन बैंकिंग कंपनियां खुले आम अवैध जमा लेने का कारोबार कैसे करते रहे। कोई करवाई क्यों नहीं हुई।

bankingमैंने अध्ययन किया है। मेरे अध्ययन के अनुसार सहारा जैसे लोगों ने कंपनी या कोआपरेटिव बनाया। वैधानिक रूप से अस्तित्व बनाकर सीधे अवैध व्यवसाय शुरू कर दिया।

जमा लेने के लिए लाइसेंस रिज़र्व बैंक देता है। रिज़र्व बैंक के लोगों को मिलाया ताकि, ये लोग स्वतः या शिकायत पर भी कोई करवाई न करें।

इन लोगों ने सांसदों से अच्छे सम्बंद बनाये,कुछ लोग को तो सांसद भी इन लोगों ने बनवाया.पुलिस और प्रशाशन में बैठे लोगों को आर्थिक विषयों की जानकारी का आभाव। ऊपर से जनप्रतिनिधियों का दवाब होने के कारन कोई करवाई नहीं हुई।

rsसेबी और इरडा के लोगों को भी इनलोगों ने मैनेज किया। पैसे के लेने देन के कारोबार की रिपोर्टिंग करने की परम्परा इंटेलिजेंस में भी नहीं रही है।

इनके बैंक अकाउंट से अवैध व्यवसाय का पता लगता। ऑडिटर्स की महत्वपूर्ण भूमिका थी। लेकिन ऑडिटर्स मिले हुए थे। यहाँ तक कि बैंक जो इनके अवैध पैसे का लेन देन करने में मद्द्द् कर रहा था ,बैंक के ऑडिटर्स भी मिले हुए थे।

मीडिया शोर मचाती लेकिन,बड़े बड़े विज्ञापन देकर मीडिया को मैनेज किया हुआ था। लाखों करोड़ का अवैध जमा लेने का व्यवसाय जब देश में खुले आम चले। नियामक की संलिप्तता हो। सांसदों का संरक्षण हो।

काला धन,पाकिस्तान, चीन या आतंकवादी को रिहा करने की बात पर चर्चा करना लोगों को खुले आम गुमराह करना ही तो है।  ( फेसबुक से)

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