इमरजेंसी के कारण जिंदा रह गया फिल्म शोले का गब्बरः जावेद अख़्तर

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sholey राजनामा.कॉम।  साल 1975 की सुपरहिट फ़िल्म ‘शोले’ के गब्बर सिंह को ठाकुर अपने जूतों के नीचे कुचलने की पूरी तैयारी कर लेता है।  वो उसे मारने ही वाला होता है कि तभी पुलिस आ जाती है।

 गब्बर को क़ानून के हवाले कर दिया जाता है।  ठाकुर को समझाया जाता है कि अपराधी को सज़ा देना क़ानून का काम है। 

ठाकुर को बात समझ में आ जाती है और फिर लात, घूंसों से पिटे ख़ून में सने गब्बर सिंह को पुलिस अपने साथ ले जाती है।  साल 1975 की सुपरहिट फ़िल्म ‘शोले’ का सब ने यही अंत देखा है। 

लेकिन क्या आपको पता है कि फ़िल्म की मूल स्क्रिप्ट में गब्बर सिंह, ठाकुर के हाथों मारा जाता है।  फिर ये बात दर्शकों के सामने क्यों नहीं आई।  यह बताया है फ़िल्म की लेखक जोड़ी सलीम-जावेद के जावेद यानी जावेद अख़्तर ने।

उन्होंने मीडिया को बताया, “वो इमरजेंसी का ज़माना था।  हमसे सरकारी अधिकारियों ने कहा कि भाई गब्बर सिंह को मारना ग़ैर क़ानूनी है।  ये अलग बात है कि गब्बर सिंह की करतूतें उन्हें ग़ैर क़ानूनी नहीं लगीं।  लेकिन हमारे सामने कोई चारा नहीं था।  तो मजबूरन हमें क्लाइमेक्स रीशूट कराना पड़ा.”

जावेद अख़्तर ने बताया कि फ़िल्म के मूल क्लाइमेक्स में गब्बर सिंह को मारने वाला दृश्य इंटरनेट पर मौजूद है।  

देखिये उपर तस्वीर में ठाकुर वह कील को देख रहे हैं, जो घायल गब्बर की पीठ में घुस जाती है और जिससे उसकी मौत हो जाती है।

…………….Madan Prasad के फेसबुक वाल से।

 

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