इन बागड़-बिल्लों के खिलाफ झारखंड निगरानी विभाग सुस्त !

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झारखंड में लूट की खुली छूट पाने वाले बागड़-बिल्लों की भरमार है। बात जब ग्राम्य अभियंत्रण संगठन (आरइओ) की हो तो इसके बागड़-बिल्लों के सामने राज्य निगरानी विभाग भी वर्षों से कुछ नहीं कर पा रही है। जबकि सब कुछ आयने की तरह साफ है।

road_scamकहते हैं कि रांची और आसपास के ग्रामीण इलाकों में सड़क निर्माण की योजना को आरइओ के अभियंताओं ने लूट योजना में परिणत कर दी थी। तात्कालीन उपायुक्त के निर्देश पर पुरे मामले की जांच हुई और कार्यपालक अभियंता यतीन्द्र प्रसाद के बयान पर रांची कोतवाली थाना में 15 अप्रैल,2000 को भादवि की धारा- 406, 467, 409, 468, 471 और 120 (बी) के तहत कार्यपालक अभियंता धनेशवर शाह, कनीय अभियंता विनोद कुमार, कनीय अभियंता अवधेश कुमार सिंह, कनीय अभियंता अरविंद प्रसाद, कनीय अभियंता पशुपति सिंह, कनीय अभियंता अनिल कुमार गुप्ता, कनीय अभियंता राजदेव सिंह, कार्यपालक अभियंता बसंत कुमार दास, कनीय अभियंता योगेन्द्र प्रसाद सिंह और योगेन्द्र शर्मा के विरुद्ध पथ निर्माण-मरम्मत की राशि गबन करने का मुकदमा दर्ज किया गया।

हालांकि, पर्यवेक्षणोपरांत कोतवाली कांड संख्या-111/2000 के  सभी अभियुक्त कार्यपालक अभियंता धनेशवर शाह, कनीय अभियंता विनोद कुमार, कनीय अभियंता अवधेश कुमार सिंह, कनीय अभियंता अरविंद प्रसाद, कनीय अभियंता पशुपति सिंह, कनीय अभियंता अनिल कुमार गुप्ता, कनीय अभियंता राजदेव सिंह, कार्यपालक अभियंता बसंत कुमार दास, कनीय अभियंता योगेन्द्र प्रसाद सिंह और योगेन्द्र शर्मा पर लगे आरोपों को सही पाया। लेकिन, इस मामले में पुलिस सुस्त ही न रही बल्कि, उसका आगे का रवैया काफी हास्यास्पद रहा। 

प्रथमिकी दर्ज होने के करीब 11 साल बाद 13 जनवरी,2011 को  एसएसपी प्रवीण कुमार ने ग्रामीण विकास विभाग के सचिव से सभी अभियुक्तों  का नाम और पता उपलब्ध कराने की मांग कर डाली। 

road_scam_letterएसएसपी प्रवीण कुमार ने ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को अपने कार्यालय पत्रांक-63/11  द्वारा लिखा कि कार्यपालक अभियंता धनेश्वर साहु के विरुद्ध आरोप पत्र समर्पित किया जा चुका है और  कनीय अभियंता अवधेश प्रसाद सिंह जमानत पर मुक्त हैं। वहीं, कनीय अभियंता विनोद कुमार, कनीय अभियंता अरविंद प्रसाद, कनीय अभियंता पशुपति सिंह, कनीय अभियंता अनिल कुमार गुप्ता, कनीय अभियंता राजदेव सिंह, कार्यपालक अभियंता बसंत कुमार दास, कनीय अभियंता योगेन्द्र प्रसाद सिंह और योगेन्द्र शर्मा के नाम पता का सत्यापन नहीं होने के कारण इनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो पा रही है। 

ऐसे में पुलिस की कार्यशैली पर सबाल उठना लाजमि है कि 11 वर्षों तक रांची पुलिस आम जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले बागड़-बिल्लों के नाम और पता की पुष्टि तक नहीं कर सकी। आखिर रांची पुलिस इस मामले में किस कारण हाथ पर हाथ धरे बैठी रही ?

इसके बाद पुलिस की जांच शैली पर  हो-हल्ला मचने पर सरकार ने मामले को राज्य निगरानी विभाग को सौंप दिया। लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है कि निगरानी विभाग भी ढाई साल में चले ढाई कदम वाली कहावत भी चरितार्थ नहीं कर पा रही है। शायद आरइओ के बागड़-बिल्लों की जंजीर उसे आगे बढ़ने ही नहीं दे रही है।  ……..मुकेश भारतीय, राजनामा.कॉम

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