आशुतोष के आंसू, पत्रकारिता को चुनौती !

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ashutoshराजनामा.कॉम। “…ये पत्रकारिता नहीं है…..ये कुछ और है…..कृपया इसे बंद करें…..! “रो-रो कर,आंसुओं के साथ, विलखते हुए वरिष्ठ पत्रकार रह चुके आशुतोष के इन शब्दों में ना तो कुछ बनावटी है और ना ही कोई राजनीति।

सक्रिय पत्रकारिता से अलग हो आशुतोष ने समाज सेवा के लिए, भ्रष्ट व्यवस्था से लड़ने के लिए, परिवर्तन के लिए अरविन्द केजरीवाल की “आप” का दामन थामा। लेकिन देश के भ्रष्ट राजदल, भ्रष्ट नेताओं ने कभी किसी को बख्शा है?

किसान गजेन्द्र की”आप”की रैली में आत्महत्या की दर्दनाक घटना पर जिस प्रकार सभी राजदल घिनौनी सियासत कर रहे हैं उससे उनका अमानवीय, असंवेदनशील बल्कि समाजद्रोही चेहरा बे-नकाब हुआ है।

दुःख तो इस बात का है कि हमारी बिरादरी,पत्रकारिता के अनेक सदस्य,अनेक वरिष्ठ , बकौल प्रधानमंत्री मोदी “बाजारू”और बकौल वी के सिंह व मार्कंडेय काटजू “वेश्या” बन चुके हैं।किसी को पराजित-अपमानित करने की “सुपारी’ ले ये हर दिन अपने कपड़े उतार नग्न-नृत्य कर रहे हैं–बेशर्म “…..या” की तरह।

आज आशुतोष को विलखना पड़ा तो इनके कारण ही। आशुतोष के आंसू बनावटी नहीं थे।बे-गैरत पत्रकारों के पाप का दर्द उनकी आँखों से आंसू बन कर बाहर आ रहे थे। अपवाद स्वरुप स्वच्छ, मूल्य आधारित पत्रकारिता कर रहे शेष पत्रकारों को चुनौती है कि वे सामने आयें,प्रतिवाद करें।

मैं नहीं मानता कि सबकुछ ख़त्म हो गया है। ढेर सारे पत्रकार हैं। विशेषकर युवा पत्रकार जो ऐसा लांछन स्वीकार करने को तैयार नहीं। आगे आयें वे,निडरता पूर्वक”सुपारी धारकों” का सामना करें। समाज आपका सुरक्षा-कवच बनेगा। चुनौती है आपको-क्या आशुतोष के आंसू व्यर्थ जाने देंगे ?

sn vinod…..फेसबुक वाल पर वरिष्ठ संपादक-पत्रकार एस.एन. विनोद  की इस पोस्ट पर हुई शुरुआती कमेंट इस प्रकार हैः 

  • Narendra Parihar and 33 others like this.
  • Omprakash Miglani Bebak lekh ke liye aapko sadhuwad, but facts remains that there are certain blacksheep patrakar they are responsible for current cituatition regarding the image bring created of by certain persons. One thing which is hurting me as citizen of India that there is no much protest by print and electronic media, which raises many questions.
    3 hrs · Edited · Like · 1
  • Harish Chander Sansi Sn Vinod जी,
    समाज के किसी भी वर्ग के सभी लोग न तो बुरे होते हैं न ही भ्रष्ट. लेकिन उसमें एक छोटे से अंश के दुर्व्यवहार का दुष्परिणाम बाकी संको भी भुगतना पढ़ जाता है.
    सभी जानते हैं कि कौन बिकाऊ है और कौन नहीं.

    हां कुछ छद्म वेश में अच्छे बने रहते हैं.
    रही बात इस मामले कि तो सारा सच धीरे धीरे सामने आ जायगा कि वस्तुस्थिति क्या है. अभी इस मामले में कोई भी टीका-टिप्पणी करना समयपूर्व ही होगा.
    3 hrs · Like · 1
  • Astro Deepak Dubey आदरणीय विनोद जी कम से कम आपने सत्य कहने का साहस तो किया , कल से मेरा भी मन क्रोध और घृणा से भर उठा है मीडिया और राजनेताओं को देखकर !
    2 hrs · Like · 1
  • Astro Deepak Dubey आचार्य चाणक्य ने कहा है कि जिस देश की प्रजा भी भ्रष्ट हो चुकी हो वहां कोई ठग ही शासन कर सकता है , इमानदार तो मारा जायेगा . केजरीवाल या तो मार दिया जायेगा या किसी साजिश में फसाकर जेल में डाल दिया जायेगा ! स्वर्गीय गजेन्द्र की आत्मा को इश्वर शान्ति दें और ईश्वर ना करें ऐसी घटना की पुनरावृत्ति हो परन्तु क्या केवल गजेन्द्र ने ही आत्महत्या की है ? और बाकि आत्महत्याओं के लिए जिम्मेदार कौन ? बाकि किसान जो आत्महत्या कर रहे हैं उनकी इतनी मीडिया कवरेज क्यों नहीं ? उनकी शवयात्रा में इतने राजनेता क्यों नहीं ? उनको इतना मुवावजा क्यों नहीं ? क्या वे किसान नहीं है ? क्या उनके प्रति इतनी संवेदना आवश्यक नहीं ? या केवल आप की रैली में आत्महत्या हो गयी इसलिए इतना दर्द मीडिया और राजनेताओं को ? इस पर प्रबुद्ध लोगों को विचार करना चाहिए … हम किसी दल या पार्टी से जुड़ें हैं इसलिए हमें न्याय और अन्याय को अनदेखा नहीं करना चाहिए , और ये सबके सोचने का विषय है , जो लोग एक – एक पल का विडिओ शूट कर रहे थे क्या उनकी भी उस समय कोई भूमिका हो सकती थी क्या ? या केवल सनसनी खेज खबर बने इसकी जल्दी थी ? अब तक जितने गजेन्द्र मरे और आज जो मरेंगे उसके वास्तविक जिम्मेदार कौन हैं ये विचारणीय विषय है …..
    2 hrs · Like · 2
  • Narendra Bahadur Singh Singh Jile star ke patrakaro ko paisa lekar bite chalate aur rokate dekha hai maine. 15 Aug.,26 Jan.adi ko pado per niyukt netano se “tyohari”ke roop paise lete bhi dekha hu.
    Lekin jab Amitabh Agnihotriji Duniya ke sabko chor samajhkar chillate hai,aur channel per aye pravakta maun ho jate hai to bahut koft hota hai.
  • Krishna Nagpal Aashutosh k e rone bilkhne ka majak wo log oora rahe hain jinone aap ko kosane ki kasam khai hai aashutosh aik sacche patrkar hain oon ka dard samjha jana cahiiye

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