आलोक जी, भड़वे और दलाल हैं हम पत्रकार !

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अनंत झा

हम सत्ताधारियों के पिछलग्गू है। हमें आपकी पीड़ा नहीं दिख रही है। हमने अपने इमोशन पर तेजाब डाल लिया है। हमें आपकी परेशानी से क्या? आप ना सांसद हैं, ना विधायक हैं और ना ही कोई धन्नासेठ सो हमें आपकी बीमारी से क्या?

आलोक जी, आप तो अख़बार में पूरे पन्ने का विज्ञापन भी नहीं दे सकते और ना ही किसी चैनल का टाइम स्लॉट खरीद सकते हैं। आप तो पत्रकार ठहरे वो भी छोटी जगह के।

आप रांची और दिल्ली के भी तो पत्रकार नहीं हैं, जो सत्ता के बैकडोर का फायदा किसी को दिला देंगे। आपकी बीमारी किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया जाने वाला गिफ्ट नहीं है और ना ही किसी अधिकारी द्वारा दिया जाने वाला गिफ्ट, जिसे लेने के लिए हम लोहालोट हुए जायेंगे। रही बात प्रेस क्लब और पत्रकारों के संगठन की तो प्रेस क्लब के नाम पर की जाने वाली वसूली शराबखोरी के लिए होती है।

आपको मदद करने से पत्रकार को क्या फायदा? आलोक जी हमें माफ़ कर दीजिए। सत्ता के सुख भोगने के आदी हम पत्रकारों को आपकी पीड़ा नहीं दिख रही है।

आलोक जी आप तो बहादुर हैं, अकेले इस पीड़ा से लड़ रहे हैं। भगवान से प्रार्थना है कि आप जल्द स्वस्थ होकर वापस लौटें ताकि, हम अपनी सच्चाई को देख सकें।

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