आलूबुखारे खायें और कैंसर भगायें

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आलूबुखारे का पेड़ लगभग 4 से 5 मीटर ऊंचा होता है। इसके फल को आलूबुखारा कहते हैं। यह पर्शिया, ग्रीस और अरब के आस-पास के क्षेत्रों के अलावे हमारे देश में उतराखंड, जम्मू-कश्मीर , हिमाचल प्रदेश जैसे प्रदेशों में भी खूब पाया जाता है।

आलूबुखारे का रंग ऊपर से मुनक्का के जैसा और भीतर से पीला होता है। पत्तों के भेद के अनुसार आलूबुखारे की 4 जातियां होती हैं। अधिकतर यह बुखारा की ओर से यहां आता है, इसलिए इसे आलूबुखारा कहते हैं। इसके बीज बादाम के बीज की तरह ही परन्तु कुछ छोटे होते हैं। यह फल आकार में दीर्घ वर्तुलाकार होकर एक ओर फूला हुआ होता है। अच्छी तरह पकने पर यह फल खट्टा, मीठा, रुचिकर और शरीर को फायदेमंद होता है।
आलूबुखारा का लेटिन नाम प्रूनस डोमेस्टिका है। आलूबुखारे को मुहँ में रखने से प्यास कम होती है। यह मलरोधक है लेकिन कब्ज़ नहीं करता। कब्ज़ दूर करता है। यकृत को ताक़त देता है। पीलिया ठीक करता है। आलूबुखारा रुचिकारक, बवासीर, ज्वर, वायु को दूर करता है.
हर रोज आलूबुखारे का एक गिलास जूस पीना स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। इसमें विटामिन के रूप में पोषक तत्व तो होते ही हैं, बल्कि यह कैंसर से भी बचाए रखता है।

हाल ही में टेक्सास एग्रीलाइफ की एक रिसर्च से पता चला है कि आलूबुखारे को साबुत या जूस के रूप में अपने नियमित खान-पान में शामिल करने से कैंसर की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसकी वजह यह है कि इसमें अच्छी मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं, जो कैंसर से बचाए रखते हैं। आजकल की व्यस्त दिनचर्या के कारण अधिसंख्य लोग संतुलित खान-पान नहीं ले पाते हैं, जिससे शरीर को जरूरी विटामिंस व मिनरल्स नहीं मिलते। ऐसे में आलूबुखारा फायदेमंद साबित हो सकता है।

 

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