आरएसएस से दूरी के बीच बोले बिहारी बाबू- भाजपा पहली और आखिरी पार्टी

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shatrughan-sinhaबिहार विधानसभा चुनाव के दौरान और चुनाव परिणाम घोषित किये जाने के बाद अपने बयानों के कारण सुर्खियों में छाये रहने वाले भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) सांसद शत्रुघ्न सिन्हा से अब उनकी ही पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने दूरी बनानी शुरू कर दी है।


एक निजी समारोह में शामिल होने के लिए नागपुर आये ‘बिहारी बाबू’ को संघ के नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित पार्टी के कई नेता भी नजरअंदाज कर रहे हैं।

श्री गडकरी भी आज शाम होने वाले उसी समारोह में शिरकत करने वाले थे, जिसके लिए श्री सिन्हा यहां पहुंचे हैं लेकिन श्री गडकरी किसी अन्य कार्यक्रम में शरीक होने के लिए यहां से रवाना हो गये।

राजनीति विश्लेषकों के अनुसार श्री गडकरी ने श्री सिन्हा को नजरअंदाज करते हुए नागपुर से गये हैं।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि श्री गडकरी का पहले से ही व्यस्त कार्यक्रम था और वह तयशुदा कार्य्रकम में शामिल होने ही नागपुर से बाहर गये हैं। श्री सिन्हा ने श्री गडकरी से मिलने का समय भी नहीं मांगा था इसी कारण दोनों नेताओं के बीच मुलाकात नहीं हुई। 

एक संघ प्रचारक के अनुसार सरसंघचालक मोहन भागवत और संघ के अन्य वरिष्ठ नेता नागपुर में नहीं हैं इसी कारण श्री सिन्हा से उनकी भी मुलाकात नहीं हो पायी।

हालांकि श्री सिन्हा को रेशमबाग स्थित संघ के मुख्यालय में बनी स्मृति मंदिर के दर्शन के लिए भी मुख्यालय में जाने की अनुमति नहीं मिली। सूत्रों के अनुसार श्री सिन्हा संघ के नेताओं से मिलकर अपनी स्थिति स्पष्ट भी करना चाहते थे।

श्री सिन्हा ने यहां संवाददाताओं से कहा कि वह एक समारोह में शामिल होने नागपुर आये हैं और वह दिल्ली में संघ के नेताओं से मुलाकात कर अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने कहा कि श्री भागवत उनके लिए पिता समान हैं और आरक्षण पर उनके बयान को बौद्धिकता से समझना चाहिए।

उन्होंने कहा कि श्री भागवत के बयान को लोगों को अच्छी तरह समझाने में भाजपा के नेता नाकाम रहे। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी नेताओं के खिलाफ बोलने वाले श्री सिन्हा ने नागपुर दौरे में अपना सुर पूरी तरह बदल लिया है और वह अब खुलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में जितनी भी सीटें भाजपा को मिली हैं, वे श्री मोदी के आक्रामक तेवर के कारण ही मिली हैं।

उन्होंने चुनावी नतीजे को जातिगत दृष्टि से देखने की सलाह देते हुए कहा कि आधा चुनाव तो उसी दिन हो गया था, जब नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस एक साथ आये, जिसके कारण यादव, मुस्लिम, कुर्मी और कांग्रेस के पारंपरिक मतदाताओं को मिलाकर कुल 45 प्रतिशत उनके खेमे में चला गया।

नीतीश कुमार से अपनी मुलाकात को औपचारिक और शिष्टाचार भेंट कहते हुए उन्होंने दलील की कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार के कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी शामिल हुए थे।

उन्होंने इसे राजनीतिक परिपक्वता की संज्ञा देते हुए कहा कि पूरे मामले को इस तरह नहीं पेश किया जाना चाहिए कोई नेता अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल हो रहा है।

उन्होंने कहा,“भाजपा मेरे लिए पहली और आखिरी पार्टी है। ” उन्होंने एक बार फिर बिहार चुनाव की रणनीति में खुद को नजरअंदाज किये जाने पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को भी पूरे मामले के दौरान अंधेरे में रखा गया।

उन्होंने कहा कि एक स्टार प्रचारक होने और बिहार का होने के बावजूद पार्टी ने उन्हें पूरी चुनावी प्रक्रिया से अलग-थलग रखा और सभी काम बाहरी नेताओं को सौंपे गये।

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