आदिवासियों को आदिवासी ही रहने दें रघुवर जी

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लाल सूरज नाथ शाहदेव

झारखंड में लगभग 26%आदिवासी रहते है उनका जिवोकोपार्जन का साधन कृषि मात्र होता है । आरक्षण के कारन कुछ आदिवासी भाई बहन नौकरी करते है। लेकिन 90 % खेती।

आप आदिवासी समुदाय के लोगो को बहुत कम ठिकादार या ब्यापारी या बिल्डर के रूप में पाएंगे।

अगर उनकी पुरखो की खेती लायक जमीन को भी सरकार ले लेगी और कुछ कागज के टुकड़े उन्हें देती है तो वो बेचारे आदिवासी उस पैसे का कुछ सदुपयोग नही कर पाएंगे। ज्यादा से ज्यादा घर कार लेंगे और कुछ ही दिनों में पैसा ख़त्म। फिर वो भीख मांगेंगे या रिक्शा चलाएंगे या फिर आप जैसे लोगों के यहाँ नौकर नौकरानी का काम करेंगे।

तो आपका जबाब होगा तो बिकास कैसे हो?

Cnt और Spt एक्ट 1908 के आस पास बना था (शायद) तो क्या 1908 से लेकर आज तक बिकास हुआ ही नही क्या।

अगर cnt एक्ट के रहते बिकास हुआ तो फिर बदलाव क्यों।

आदिवासी हो या मूलवासी बिकास के लिए जमीन दिए है वो चाहे रेलवे हो या सडक या डैम या डिफेन्स या कल कारखाना सभी के लिए जमीन दिए है लेकिन इससे उन्हें कितना लाभ मिला उसका अध्यन होना चाहिए। जमीन आदिवासियों और मूलवासियों की जा रही है और लाभ बिहार, छत्तीसगढ़,बंगाल और उड़ीसा उतरप्रदेश के लोग उठा रहे है।

आप सबों की जमीन जायदाद तो अपने अपने राज्य में सुरक्षित है जब झारखण्ड बर्बाद हो जायेगा आप अपने गाँव राज्य चले जायेगे लेकिन हम कहाँ जायेंगे।

अगर आप डैम या सडक के लिए जमीन लेते है तो बदले में आदिवासियों को कही और उतना ही जमीं दे ताकि वो फिर से खेती बारी कर सके।

आप कहेगे जमीं कहा से आएगा तो जनाब अगर आप सर्वे करे तो आपको बहुत मात्रा में गैर मजरुआ जमीन आपको मिल जायेगा।

दूसरी बात अगर आप शहर में बैंक ,स्कुल ,कोलेज,कारखाना,हाउसिंग कॉलोनी मार्किट के लिए जमीन एक्वायर करते है तो वो लीज में कुछ सालों के लिय ले। उनको पैसा भी मिल जअयेगा और जमीं की मालिकाना हक भी उनके पास रहेगा। लीज समाप्त होने पर फिर से उन्हें पैसा देकर लीज की अवधि को आगे बढाये। इस तरह से उन्हें फिर से पैसा मिल जायेगा।

सबसे महत्वपूर्ण बात मुख्यमंत्री जी झारखण्ड में खेती लायक भूमि बहुत कम है उसे बचाए। उसे ख़त्म न करे।

बरना एक दिन झारखण रेगिस्तान बन जायेगा। जिस प्रकार से खनिज पदार्थ का खनन हो रहा है और उसके बाद वहा गढ़े ही गढ़े नजर आ रहा है यह इस क्षेत्र को रएगिस्तान की और ले जारहा है।

लेखकः  झारखण्ड विकास मोर्चा ( प्र0) के केन्द्रीय सोशल मीडिया सह प्रभारी हैं।

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