आज 31 मई को काला दिवस मना रहे हैं हम !

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राजनामा.कॉम (मुकेश भारतीय)। आज 31 मई है। वर्ष 2012 में आज के ही दिन झारखंड में घृणित राजनीति की कोख की पैदाईश मीडियाई गुंडों के आदेशपालक पुलिस की अकर्मण्यता का शिकार हुआ था। इस कारण मुझे 14 दिनों तक जेल में रहना पड़ा था।
bhartiya_psचित्र तात्कालीन सीएम अर्जुन मुण्डा और स्पीकर सीपी सिंह के आवास के पास गोंदा थाना के हाजत की है। देश व समाज के जिन पापियों की चेहरों का चेहरा देखना तक पसंद नहीं करता, जिसके नरकस्थली पर अपना कदम रखना भी पाप समझता हूं…व्यवस्था के वैसे अवैध पैदाइश ने आरोप लगाया था कि मैं उससे कई बार मिला और www.raznama.com पर उसकी पाप की नगरी की पोल न खोलने की एवज में उसके फाईव स्टार आवास और अखबारीय ऑफिस में 15 लाख रुपए की रंगदारी मांगी।

पुलिस ने मुझे बिना कोई आवाज दिए सीधे पिछवाड़े से छत पर चढ़ कर रात करीब 12 बजे उठा लिया। उसने किडनैपरों की तरह मुझे सीधे रांची डीजीपी बीडी राम ( अब पलामू से भाजपा सांसद) के पास चलने को कहा। सुबह कोर्ट में उपस्थित करने के ठीक पहले बताया कि मुझे किस आरोप में अरेस्ट किया गया है। मेरी गिरफ्तारी के बाद और कोर्ट ले जाने के ठीक पहले शिकायत दर्ज की गई थी। 

यह मामले का एक सच और बड़ा आश्चर्य ही है कि मीडिया व्यवसाय में रातो-रात उभरे जिस गुंडे ने मुझ पर आरोप लगाए,  आज 3 साल  बाद भी उसकी एक झलक नसीब नहीं हो पाई है। वह भूतनी के किस खो में रहता है, उससे आज तक अनभिज्ञ हूं।

पुलिस भी उसके इस घटिया आरोप में संलिप्त हो गया। तात्कालीन गोंदा थाना इंचार्य फगुनी पासवान, ओरमांझी इन्चार्य सरयु आनंद, इन्सपेक्टर हरिश्चन्द्र सिंह, डीसपी राकेश मोहन सिन्हा से लेकर एसपी साकेत कुमार सिंह तक उस मीडियाई गुंडे के तलवे चाटते नजर आए।
16062012231सबसे शर्म की बात तो यह थी कि रांची के सूरमा संपादक-पत्रकार, जिन्हें मीडिया के छात्र और लोग पूजा करते हैं..वे भी सच को दबाने के खेल में शामिल रहे या फिर आंखे मूंदे रहे। एक महान धूर्जटि संपादक-पत्रकार ने तो मुझे जेल भेजवाने के लिए तात्कालीन सीएम अर्जुन मुंडा के पैरो तक गिर पड़ा। अब मुंडा जी की क्या बिसात…जब किसी बड़े मीडिया दलाल चरण चाट रहा हो और वह हिटलरी फरमान न जारी करें !

वेशक मैंने आज के दिन को उन घावों को कुरेदने में लगाता हूं….जो आप सीधे तौर पर समझ सकते हैं कि जिसे “सत्ता और मीडिया के गुंडों” ने दिया था। वह इसलिए कि उनके खिलाफ मेरे तेवर न टूटे। मेरे कर्म से उनकी सदैव फटती रहे।
आज फिर एक बार मैं उन साथियों-शुभचिंतकों का आभार प्रकट करना चाहता हूं, जिन्होंने मुझे और राजनामा.कॉम को अचानक आए उस ‘आपदा’ में हरसंभव साथ  दिया था और मानसिक मजबूती प्रदान की थी।
जय मां भारती।

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