आजाद हिंद फौज के कैप्टन अब्बास अली का इंतकाल

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abbasaliआजाद हिंद फौज के कैप्टन रहे अब्बास अली का अलीगढ़ में इंतकाल हो गया। वे 94 साल के थे।

उनका जन्म 3 जनवरी 1920 को उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर जिले की खुर्जा तहसील में हुआ था।

वे आजाद भारत में डा. राम मनोहर लोहिया के करीबी रहे और उनके द्वारा चलाए गए समाजवादी आंदोलन का भी हिस्सा रहे।

बचपन से ही वे भगत सिंह की क्रांतिकारी विचारधारा से प्रभावित थे और जब वे हाई स्कूल में पढ़ते थे, उसी समय अपने दोस्तों के साथ भगत सिंह द्वारा बनाई गई नौजवान भारत सभा से भी जुड़े थे।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात कुवंर अशरफ मुहम्मद से हुई और वे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन से भी जुड़े।

1939 में वे ब्रिटिश सेना से जुड़े और द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-45) के दौरान यूनाइटेड इंडिया समेत दक्षिण पूर्व एशिया में कई जगहों पर तैनात किए गए।

1945 में जब सुभाष चंद्र बोस ने ब्रिटिश सेना में बगावत किए तो उन्होंने ब्रिटिश सेना को छोड़कर इंडियन नेशनल आर्मी या आजाद हिंद फौज से जुड़ गए।

लेकिन बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। परंतु, 1947 में भारत के आजाद होते ही सरकार ने उन्हें आजाद कर दिया।

1948 में वे आचार्य नरेंद्र देव, जयप्रकाश नारायण और डा राम मनोहर लोहिया के करीब आए और समाजवादी आंदोलनों में भाग लिए।

1967 में उत्तर प्रदेश में चौधरी चरण सिंह की गैर कांग्रेस सरकार बनवाने में काफी अहम भूमिका निभाए। 1948-1974 के बीच कई आंदोलनों में भाग लेने के कारण उन्हें 50 से भी ज्यादा बार गिरफ्तार किया गया।

1975-1977 के बीच आपातकाल के दौरान उनके ऊपर डीआइआर (डिफेंस ऑफ इंडिया रूल) और मीसा (मेंटीनेंस ऑफ इंटरनल सेक्योरिटी एक्ट) लगाकर 19 माह तक जेल में रखा गया।

जब 1977 में आपातकाल खत्म हुआ और जनता पार्टी सत्ता संभाली तो वे जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश यूनिट के पहले अध्यक्ष बने।

1978 में उन्हें पहली बार उत्तर प्रदेश की विधान परिषद में छह साल के लिए सदस्य चुना गया।

वे उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड के सदस्य भी छह साल तक रहे। उन्होंने 2008 में रहूं किसी का दास्तेनिगर-मेरा सफरनामा आत्मकथा भी लिखी। जिसे उनकी उम्र 90 साल पूरी होने होने पर दिल्ली मे लोकार्पण किया गया।

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