आजसू को छोड़ झाविमो को हथियाने की फिराक में भाजपा

Share Button

इन दिनों भाजपा का शीर्ष नेतृत्व झारखंड में पार्टी के प्रथम मुख्यमंत्री एवं झाविमो(प्र) नेता बाबूलाल मरांडी को मनाने में जी जान से जुटी है। इसका सबसे बड़ा कारण सत्तासीन एनडीए गठबंधन की रघुवर सरकार से सहयोगी आजसू को निपटाना और झाविमो(प्र) को साथ कर भाजपा की पकड़ मजबूत करना है।

भाजपा झारखंड विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद अपने दम पर सरकार नहीं बना सकी है। वह अपने सहयोगी आजसू की बैसाखी पर निर्भर है।

MARANDI_AMITझारखंड की 81 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की है। झारखंड मुक्ति मोर्चा प्रदेश में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। जिसके नेता हेमंत सोरेन ने एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने की घोषणा कर चुके हैं। आजसू पार्टी के साथ बीजेपी ने चुनाव पूर्व गठबंधन किया था और इसी की 5 सीटों के दम पर रघुवर दास के नेतृत्व में सरकार बनी है।

पूरे देश में झारखंड राजनीति अस्थिरता के लिए जाना जाता है। ऐसे में भाजपा चाहती है कि वह आजसू पार्टी के भरोसे न रहे।

इसी रणनीति के तहत भाजपा अपने पूर्व नेता बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा(प्रजातांत्रिक) का विलय कराने में जुटी है।

भाजपा प्रमुख अमित शाह और मरांडी की इस मसले पर मुलाकात भी हुई। मरांडी की पार्टी को इस चुनाव में 8 सीटों पर कामयाबी मिली है।

हालांकि मरांडी ने दो सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन दोनों जगह उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

रघुवर दास की शपथ से एक दिन पहले अमित शाह ने मरांडी को दिल्ली बुलाया था। दिल्ली में ही दोनों नेताओं की मुलाकात हुई।

शाह ने मरांडी के सामने उनकी पार्टी का भाजपा में विलय करने का प्रस्ताव रखा। हालांकि मरांडी ने इस पर तत्काल अमल करने से इनकार कर दिया। लेकिन मरांडी ने शाह को आश्वस्त किया है कि उनकी पार्टी सरकार पर हरसंभव संकट आने पर साथ देगी।

कहते हैं कि मरांडी सरकार में शामिल होने के लिए तैयार थे। भाजपा इन्हें दो मंत्री पद भी देने को राजी थी लेकिन रणनीति विलय पर शिफ्ट हो गई।

भाजपा गठबंधन बढ़ाने के बजाय मरांडी को शामिल कर झारखंड में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है लेकिन मरांडी संतोषजनक स्थिति महसुस करने तक भाजपा से दलीय दूरी बनाये रखना चाहते हैं।

कई भाजपा नेताओं  का मानना है कि मरांडी ने पार्टी में शामिल होने का भरोसा दिया है और उम्मीद है कि ऐसा जल्द ही होगा।

अभी रघुवर दास कैबिनेट में सात मंत्री पदों की जगह खाली है। मरांडी की पार्टी के विलय की बात साफ होने के बाद ही दास कैबिनेट का विस्तार किया जाएगा।

Share Button

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.