आखिर शाहिद अली खां से कौन सी दुश्मनी चुकाई गई ?

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nitish-Shahid-Ali-Khanबिहार सरकार ने अपने अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री शाहिद अली खां को क्यों अपमानित होने दिया ? 8 जनवरी को पूरे दिन समाचार चैनलों पर उनपर आतंकियों से सम्बन्ध होने के आरोप लगते रहे , शाहिद अकेले उस आरोप से जूझते रहे, न मुख्यमंत्री न कोई मंत्रिमंडलीय सहयोगी उनके बचाव में आगे आया। आरोप भी निराधार नहीं था। केंद्र सरकार की एक सुरक्षा एजेंसी के पत्र में उनपर सिमी और आईएसआई के आतंकियों के साथ सम्बन्ध रखने का संदेह व्यक्त किया गया था। इस पत्र के आधार पर ही समाचार चैनलों पर खबर चल रही थी।

हैरानी की बात यह है कि पुलिस मुख्यालय ने ऐसे किसी पत्र की जानकारी से ही इंकार कर दिया। इससे शाहिद पर संदेह और गहरा गया। जब शाहिद की पूरी मिट्टी पलीद हो गई , विपक्ष ने भी उनपर हमला बोल दिया और सीधे -सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आरोप लगने लगे, बोधगया मंदिर विस्फोट समेत भाजपा रैली में ब्लास्ट से इस मामले को जोड़ा जाने लगा तब सरकार की तन्द्रा टूटी। दिन में जिस पुलिस प्रवक्ता ने पत्र की जानकारी से इंकार किया था , उसी ने रात 8 बजे आनन -फानन में प्रेस कांफ्रेंस कर पत्र मिलने कि बात स्वीकार की।

पुलिस प्रवक्ता ने कहा की एसएसबी के पत्र के आधार पर जाँच कराई गई थी जिसमे मंत्री पर संदेह कि पुष्टि नहीं हुई। सभी संदेह निराधार पाये गये। तब तक तो शाहिद अली खां की राष्ट्र भक्ति और अबतक कमाई प्रतिष्ठा का फलूदा निकल चुका था। इस सफाई के बाद राजनीति का काला, क्रूर और घिनौना चेहरा सामने आ गया है। सवाल यह खड़ा होता है कि पुलिस मुख्यालय दिन में क्यों चुप रहा ? किसके निर्देश पर पुलिस प्रवक्ता ने पत्र मिलने और जाँच होने की बात से इंकार किया ? फिर किसके निर्देश पर रात में सभी तथ्य स्वीकार किये ?

एक दिन बाद मुख्यमंत्री ने कहा की पूरा मामला उनकी जानकारी में था। फिर वे अपने मंत्री के बचाव में तत्काल आगे क्यों नहीं आये ? शाहिद को अकेले आरोप झेलने के लिये क्यों छोड़ दिया ? जो बात उन्होंने 8 फ़रवरी को कही वही बात 7 फ़रवरी को दिन में भी कह सकते थे ? इससे मंत्री को जिल्लत तो नहीं झेलनी पड़ती। शक तो यह भी होता है कि पहले मीडिया को पत्र लीक किया गया , फिर पुलिस ने पत्र की जानकारी से इंकार किया और अपने मंत्री को जलील कराया गया। क्या यह सोची समझी साजिश नहीं लगती ?

वह कौन सी वजह है की शाहिद को उनकी अपनी ही सरकार गद्दार साबित करने पर तुली थी ? आखिर अल्पसंख्यक किसपर भरोसा करे ? अब मुख्यमंत्री इस पूरे प्रकरण के लिये भाजपा को दोषी ठहराकर उसकी निंदा कर रहे हैं। अब उन्हें कौन समझाये की यह मामला भाजपा ने नहीं चैनलों ने उठाया था। राजनीतिक दल तो बाद में आये। राजद के अब्दुल बारी सिद्दिकी ने भी इसपर सीएम से सफाई मांगी थी। मंत्री पर आतंकी से सम्बन्ध का आरोप लगे तो क्या लोग चुप रहेंगे ? जैसे मुख्यमंत्री और उनकी पुलिस चुप थी ……. ? 

bagi………… टीवी जर्नलिस्ट प्रवीण बागी  जी अपने फेसबुक वाल पर

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