आई-नेक्स्ट की गंदगी सुनाते सुनाते रो पड़ीं प्रतिमा  भार्गव

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pratima-katjuपिछले सात अक्टूबर को प्रेस क्लब आफ इंडिया में ‘मीडिया की मारी प्रतिमा बोलेगी’ कार्यक्रम में आगरा की समाज सेविका प्रतिमा भार्गव ने आई-नेक्स्ट अखबार के दुर्व्यवहार, मानहानि, प्रताड़ना की कहानी सुनाते सुनाते रो पड़ीं.

घटिया किस्म की पेज थ्री और पेड पत्रकारिता करने वाले इस अखबार ने मसालेदार खबर परोसने के चक्कर में इस समाजसेविका के चाल चलन चरित्र पर ऐसी फर्जी मनगढ़ंत खबर छाप दी कि इनका जीना मुश्किल हो गया.

घर परिवार समाज में इनकी इज्जत दाव पर लग गई. प्रतिमा ने इस दौरान क्या क्या झेला, उन्होंने विस्तार से बताया. बताते सुनाते वह रोने लगीं. उनके साथ आए उनके पुत्र की भी आंखों से आंसू बह निकले.

इस महिला ने दैनिक जागरण समूह के अखबार आई-नेक्स्ट द्वारा किए गए उत्पीड़न की जो दर्दनाक कहानी बताई, उसे सुन कर पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया और ज्यादातर लोग भावुक हो गया. सबने एक सुर से जागरण समूह के मालिकों महेंद्र मोहन गुप्ता, शैलेष गुप्ता, संजय गुप्ता समेत आई-नेक्स्ट के ग्रुप एडिटर आलोक सांवल और आगरा के एडिटर सचिन वासवानी के लिए शेम शेम कहा और इनके कुकृत्य की निंदा की.

कार्यक्रम में प्रस्ताव पारित कर जागरण समूह से अपील की गई कि वह फौरन आई-नेक्स्ट आगरा के संपादक और खबर लिखने वाले रिपोर्टर को बर्खास्त करें. प्रतिमा भार्गव मामले में प्रेस काउंसिल आफ इंडिया ने भी संपादक की निंदा करने का फैसला दे रखा है.

ऐसे में जागरण समूह द्वारा आई-नेक्स्ट आगरा के संपादक सचिन वासवानी और रिपोर्टर अरुण रावत को अब तक पद पर बनाए रखना न सिर्फ निंदनीय बल्कि शर्मनाक भी है.

प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि संपादक और रिपोर्टर को पद से न हटाने तक इन दोनों की तस्वीरें और मोबाइल नंबर सोशल मीडिया, न्यू मीडिया, मोबाइल मीडिया पर शेयर किया जाए ताकि हर कोई इन्हें फोन कर प्रतिमा भार्गव की जिंदगी को नरक बना देने के लिए शेम शेम कह सके, साथ ही फोटो देखकर इनकी शक्ल पहचान सके ताकि ऐसे पतित पत्रकारों से हर कोई दूर रहे. (साभारःभड़ास4मीडिया)

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