आईये raznama.com की नई मुहिम “ऑपरेशन इंक” से जुड़िए

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mediaआज से मैं रांची से एक मुहिम शुरु कर रहा हूं। मुहिम का नाम है…” ऑपरेशन इंक “। इस मुहिम के तहत अखबारों और उससे जुड़े लोगों का हरसंभव सही चित्रण आपके सामने लाई जाएगी। इस मुहिम में आप भी भागीदार बनिए।
दैनिक जागरण से जुड़े Pradeep Kumar Singh जी फेबुक पर हमारे मित्र हैं। उन्होंने हमारे ” धन्य हो अखबार के एसी में बैठे वेशर्म पत्रकार! ” शीर्षक वाली पोस्ट पर Harish Saurabhजी के कमेंट पर सीधा प्रहार किया है। ऐसे में जरुरी हो गया कि मैं अपने मुहिम की शुरुआत उन्ही से करुं।
मैंने अपनी पत्रकारीय जीवन की शुरुआत 90 के दशक से की है। अगर तब से ही आंकलन करुं तो आज विषम परिस्थितियां खड़ी है। कोई भी यह नहीं कह सकता कि मीडिया, राजनीति या अन्य क्षेत्र में सभी के सभी नंगे हैं।

कुछ के तन पर चड्डी-बनियान है तो कोई फटी पुरानी धोती से ही तन ढकने के प्रयास कर रहे हैं। लेकिन व्यवसायिकता के दौर में गिरती मानयवीयता कई धुंध बनाते हैं। ऐसे में जरुरी है उन धुंधों को छांटना।
आज मीडिया की पोल खोलना भी कोई आसान काम नहीं रह गया है। वर्ष 2012 में जब मैंने इस ओर रुख किया तो जेल की हवा खानी पड़ गई क्योंकि अब मीडिया हाउस का संचालन किसी खांटी पत्रकार या समाजसेवी के हाथ में नहीं है। सबकी लगाम गली-कूचों में पनपते कुकुरमुत्ते छाप माफियाओं-लुटेरों ने ले ली है, जिन्हें सत्ता की कदमताल हासिल है।

ऐसे लोगों के कारण मीडिया में असमाजिक लोग प्रवेश कर रहे हैं और सामाजिक पत्रकारों को दबा रहे हैं।
एक रिपोर्टर, एडिटर से लेकर उनके मालिक मौजा तक आखिर क्या है परेशानियां कि वे चाह कर भी अपना काम इच्छित ढंग से नहीं कर पाते हैं।

इन्ही सब सबालों के जबाब हम अपने www.raznama.com www.medialive.in www.expertmedianews.com www.rajnama.in जैसे अपने लघु प्रयासों के जरिए ढूंढने का प्रयास करेगें।

…..मुकेश भारतीय अपने फेसबुक वाल पर।

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