आइएएनएस के ब्यूरो प्रमुख का गोरखधंधा, बीबी के नाम पर लूट रहा है झारखंड आइपीआरडी

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वरिष्ठ लेखक-पत्रकार कृष्ण बिहारी मिश्र अपने फेसबुक वाल पर……

जी हां, ये शत प्रतिशत सत्य है। जिन्हें जेल में होना चाहिए, उस पर आइपीआरडी का डायरेक्टर कृपा लूटा रहा है, लाखों लूटा रहा है, वह भी गलत तरीके से। जिस विज्ञापन का अभी कोई औचित्य भी नहीं, जो एक साल से भी अधिक पुराना है, उसे नित्यानन्द शुक्ला के इशारे पर नित्यानन्द शुक्ला की पत्नी रंजना शुक्ला के नाम पर चलाये जा रहे एक पोर्टल न्यूजझारखण्ड.कॉम को दे दिया गया है और उसके भुगतान के लिए तैयारी भी कर ली गयी है।

हमने इसी पोस्ट पर एक नीचे विजूयल वीडियो डाला है, जरा आप उसे ध्यान से देखे –व्यापार सुगमता सूचकांक, बीपीएल परिवार को मुफ्त गैस कनेक्शन, सिंगल साइन आफ इज आफ डूइंग बिजनेस, दुमका में 2 अक्टूबर 2015 को आयोजित हो चुकी मुद्रा योजना के कैम्प और खूंटी में 2 अक्टूबर 2015 को संपन्न हो चुकी, सोलर सिस्टम का भी विज्ञापन न्यूजझारखण्ड.कॉम में दिखाई पड़ रहा है। ये वीडियो हमनें 2 मार्च 2017 को उसी के पोर्टल से बनायी है, आपको दिखाने-बताने के लिए कि यहां कैसे गोरखधंधे चल रहे है।

क्या कोई बता सकता है कि इन विज्ञापनों का आज के संदर्भ में क्या महत्व है? जब ये विज्ञापन महत्वहीन है तो फिर डायरेक्टर राजीव लोचन बख्शी ने नित्यानन्द शुक्ला के इशारे पर उसकी पत्नी द्वारा चलाये जा रहे न्यूजझारखण्ड.कॉम को ये सारे विज्ञापन कैसे और क्यों दे दिये? क्या इसका जवाब राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास उर्फ शाहरुख खान जी दे सकते है? क्योंकि विभाग तो उन्ही का है।

आश्चर्य, घोर आश्चर्य। नित्यानन्द शुक्ला, कुछ लोग इन्हें सब्सिडी शुक्ला भी कहते है, इनका सब्सिडी शुक्ला नाम क्यों पड़ा? इसके पीछे बहुत सुंदर कहानी है, जिसकी चर्चा हम बाद में करेंगे। जनाब को प्रेस अधिमान्यता प्रमाणीकरण समिति का सदस्य भी बनाया गया है।

ये जनाब अपनी पत्नी के नाम पर रिपोर्टर पोस्ट नामक अखबार भी चलाते है, इनकी पत्नी द्वारा हस्ताक्षरित प्रपत्र जिसमें उनकी पत्नी ने लिखा है कि उनके अखबार की प्रसार संख्या 25,000 रोजाना है, यानी एक अखबार जो 25,000 रोजाना छपती है, पर वो झारखण्ड के बाजार में कहीं भी दीखती नहीं, यानी एक और गोरखधंधा।

हमारे पास पुख्ता प्रमाण है कि नित्यानन्द शुक्ला कभी – कभी अपनी पत्नी का हस्ताक्षर भी स्वयं ही कर देते है, यह कहकर कि जब डायरेक्टर वे बनाते है, तो वे अपनी पत्नी का हस्ताक्षर स्वयं करे या उनकी पत्नी करें, क्या फर्क पड़ता है… इसका भी प्रमाण, इसी पोस्ट पर उपलब्ध है, ध्यान से देखे।

जनाब एक आइएएनएस एजेंसी के ब्यूरो प्रमुख है। कभी एक पत्रकार संघ के सम्मानित पद पर भी रह चुके है, पर इनका गोरखधंधा देखिये। आइएएनएस जिसके ये ब्यूरो प्रमुख है। इनके आइएएनएस का पता, न्यूज पोर्टल झारखण्ड न्यूज.कॉम का पता, रिपोर्टर पोस्ट अखबार का पता (जो इनकी पत्नी के नाम पर चलाया जाता है, जो अखबार कहीं छपता नहीं है, केवल विज्ञापन के लिए कभी कभार छाप दिया जाता है) एक ही है।

आश्चर्य है कि इनके द्वारा चलाये जा रहे गोरखधंधे पर पूर्व के निदेशक अवधेश कुमार पांडेय ने रोक लगायी थी और इसका पूर्ण विवरण उपर के वरीय अधिकारियों को दिया था, जिसके कारण इस नित्यानन्द शुक्ला की हालत पस्त हो गयी थी, पर जैसे ही अवधेश कुमार पांडेय यहां से मुक्त हुए, इसकी लॉटरी निकल गयी। इसने राजीव लोचन बख्शी के इशारे पर वो काम कर लिया, जिसकी इजाजत कानून भी नहीं देता।

और अब सवाल जनता की ओर से, मुख्यमंत्री रघुवर दास से…

  1. ऐसे लोग जो फर्जीवाड़ा करते है, क्या उन्हें प्रेस अधिमान्यता प्रमाणीकरण समिति का सदस्य बनाया जाना चाहिए?
  2. ऐसे लोग जो अपनी पत्नी का हस्ताक्षर स्वयं बना देते है, क्या ऐसे लोगों पर कानूनी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए?
  3. ऐसे लोग जो गलत ढंग से पूर्व में विज्ञापन ले चुके है, क्या उनके विज्ञापन की राशि पर रोक नहीं लगायी जानी चाहिए?
  4. ऐसे लोग जो गलत ढंग से अपने पद का दुरुपयोग करते हुए, जो विज्ञापन निर्गत नहीं होनी चाहिए और वह विज्ञापन वह भी डेढ साल पुराना निर्गत कर देते है, क्या ऐसे लोगों पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए?

इस पूरे प्रकरण को समझने के लिये देखें यह वीडियो…. 

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