इन संपादकों की हकीकत तो जानिये

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madan tiwariपत्रकारिता को दलाली और चटुकारता का आदर्शवादी लबादा पहनाने वाले पत्रकारो मे सबसे अव्वल दर्जे पर है प्रभात खरब के हरिवंश । इन्होने एक शब्द ईजाद किया पाजेटिव जर्नलिज्म , इसके दायरे मे क्या आता है पता है ? सतासीन दल और सरकार के कामों की प्रशंसा । मजेदार बात है कि अब यह खुद को इनाम भी दिलवाने लगे है।पभी एकाध बंधु इन्हे देश के टाप टेन मे तिसरे नंबर का मान रहे है वाह चटुकारिता, क्या पत्रकारिता का इतना बडा दुर्दिन आ गया ? लिजिये पढिये । 

अरे भाई..इन संपादकों की हकीकत भी तो जानिये
आखिर कैसे हो गए ये टॉप टेन में शुमार
जातीयता और पुराना संबंध ही है इनकी सर्वोच्च प्राथमिकता कई हैं सांसद बनने की चाह में।

आज शाम फेसबुक पर विजय पाठक नामक एक सज्जन की यह खबर कि ‘देश के टेन टॉपर संपादकों में प्रभात खबर के संपादक हरिवंश जी का स्थान तीसरा’ पढकर आश्चर्य भी हुआ, सुख भी और पत्रकारिता जगत के लिए दुखद अनुभूति भी। वह इसलिए कि टॉप टेन संपादकों में शुमार प्रभात खबर के हरिवंश जी जहां पत्रकारिता में जातियता के लिए चर्चित हैं वहीं
चौथे नंबर पर  शुमार हिंन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर अपने पुराने संबंधों के लिए अपनों को लाभ पहुंचाने के लिए। 1996 में पटना से प्रकाशित प्रभात खबर में अबतक जितने भी संपादक आए दो अपवादों को छोड सभी उनके स्वजातीय ही हैं।

बिहार और झारखंड में लगभग 70 प्रतिशत संपादकीय और अन्य कर्मचारी हरिवंश के स्वजातीय हैं। अनुभवी पत्रकारों की जमात को प्रभात खबर में लाने के बजाए हरिवंश जी के जातीय निष्ठा और और अपनी के प्रति लगाव का एक बडा उदाहरण प्रभात खबर पटना के स्थानीय संपादक प्रमोद मुकेश हैं जो कभी हिन्दुस्तान के चीफ रिपोर्टर हुआ करते थे।

उन्होंने अपने चीफ रिपोर्टर काल में हिन्दुस्तान के एक क्राइम रिपोर्टर से बेगुसराय जाने के लिए एक गाडी का इंतजाम करने को कहा। उस रिपोर्टर ने प्रमोद मुकेश के सामने ही पटना के बेऊर जेल में बंद एक कुख्यात अपराधी से बात की जिसने दूसरे दिन गाडी तो भेज दी पर उसमें तेल नहीं था। फिर उस रिपोर्टर ने जेल में बंद उस अपराधी को फोन किया तब उसने कहा कि आप तेल भरवा लें पैसे मैं भिजवा दूंगा।

तब शायद उस रिपोर्टर और प्रमोद मुकेश को ये पता नहीं था कि उस कुख्यात अपराधी को मोबाइल फोन तत्कालीन एसएसपी के मोबाइल पर सर्विलांस में है जो आईपीएस अधिकारी अभी केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं और आज भी उस की रिकार्डिंग पटना के रंगदारी सेल में सुरक्षित रखी हुई है। जबतक वो अधिकारी पटना में रहे प्रमोद मुकेश या उनके मातहतों ने उनके खिलाफ किसी तरह की खबर छापने की जुर्रत नहीं की क्योंकि उन्हें डर था कि वो अधिकारी इस रिकार्डिंग को लीक कर देंगे।

कुछ इसी तरह का मामला टॉप टेन में शुमार हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर का है जिनके कार्यकाल में पत्रकारिता के अनुभवों और जानकारों की पूछ कम उन्हें जानने वाले और उनके पुराने संपर्कों की पुछ ज्यादा हो रही है चाहे वो पत्रकारिता में अनुभवहीन ही क्यों न हों। शशिशेखर के हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक बनने के बाद पटना सहित कई स्थानों पर वैसे ही संपादक या अन्य संपादकीयकर्मी बहाल किए गए जो शशि शेखर को हिन्दुस्तान में आने के पूर्व अमर उजाला में उनके साथ थे। पटना जहां हिन्दुस्तान की सगसे ज्यादा प्रसार संख्या है वहां अकु श्रीवास्तव, के के उपाध्याय और अब तीर विजय सिंह इसके उदाहरण हैं।

ये तीनों संपादक कभी अमर उजाला में शशि शेखर के अधीन काम कर चुके हैं। बिहार में भाजपा का जदयू से अलग होने के बाद नीतीश का गुनगाण करते रहने वाले अखबारों के सुर तो अचानक बदल गए हैं पर देश के टॉप टेन संपादकों की सूची में शामिल ऐसे संपादकों के नाम हैरत में डालने वाली ही दिख रही है। एसी कमरे में बैठकर टॉप टेन संपादकों की सूचि बनाने वाले प्रबुद्ध जनों को चाहिए था कि कमसे कम वो उन राज्यों का भी दौरा कर लें जहां भरी सभा में हिन्दुस्तान जैसे अखबार के संपादक को यह कहा गया कि ‘आपका अखबार बच्चों का टट्टी पोछने के लायक भी नहीं रहा।

पढिये इनके दलाल का पोस्ट । 
 Vijay Pathak ( दलाल ) 
हरिवंश देश से टॉप तीन संपादकों में

एक्सचेंज 4 मीडिया ने देश के शीर्ष हिंदी संपादकों की ग्रेडिंग की है. इसमें प्रभात खबर के प्रधान संपादक हरिवंश टॉप तीन में शामिल किये गये हैं. प्रभात खबर परिवार के लिए यह गौरव का क्षण है. 

………..अधिवक्ता-पत्रकार मदन तिवारी अपने फेसबुक वाल पर

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