अमित-मोदी के लिए डैंजर सिम्बल बन कर उभरे हैं लालू

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lalu-rjdराजनीति में सब कुछ संभव है। फर्श और अर्श की दूरी अधिक नहीं होती है। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद लालू यादव के उपर उपरोक्त बातें सटीक बैठती है।

लालू प्रसाद एक बार फिर बिहार की राजनीति में सबसे बड़े कद्दावर नेता बन कर उभरे हैं। यहां भाजपा दिग्गज पीएम नरेन्द्र मोदी की हुंकार और अमित शाह की फुंफकार भी कोई काम न कर सकी।

उन्हें जहां भी मौका मिला, लालू ने दोनों पर सीधा और कड़ा प्रतिकार किया। विरोधियों ने उन पर जितने हमले तेज किए, उनका खोया जनाधार, खासकर पिछड़े, दलित और अल्संख्यक वर्ग के लोग उनके पक्ष में गोलबंद होते गए।

लालू जी ने अपनी किला फतह से एक बात और साफ कर दिया है कि भाजपा अपने विरोधियों पर जिस तरह से हमले करती है, अगर उसी शैली में प्रतिकार किए जाएं तो उसकी राह आसान न होगी।

हालांकि, इसकी हल्की लेकिन साफ झलक झारखंड विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिली थी। भाजपा के सुपर स्टार प्रचारक पीएम नरेन्द्र मोदी ने झामुमो के बाप-बेटों की राजनीति वाले तीर छोड़े तो उसके सीएम हेमंत सोरेन ने अपनी सभाओं में कड़ा विरोध किया और आक्रामक जबाब दिए। इसका नतीजा यह रहा कि भाजपा का अकेले बहुमत आने का सपना तो चूर हुआ ही, झामुमो की सीटें भी कम न कर सकी।

आइए देखते हैं वे कौन से कारण रहे, जिन्होंने लालू जी को एक बार फिर से ‘वोटों का जादूगर’ बना दिया….

  1. ये बात पहले से ही साफ थी कि लालू की पार्टी को चाहे जितनी सीटें मिलें लेकिन अगर महागठबंधन सत्ता में आता है तो सीएम नीतीश कुमार ही होंगे। लालू यादव ने अपनी हर सभा में भी यह बात कही थी। नीतीश की साफ छवि को लालू ने बखूबी भुनाया।
  1. लालू बिहार की राजनीति को भली-भांति जानते हैं और उनको पता है कि किस तरह से जनता की नब्ज को पकड़ना है। पिछला कुछ समय उनके लिए खराब ज़रूर रहा लेकिन इस बार उन्होंने साबित कर दिया कि इस मैदान के वे मंझे हुए खिलाड़ी हैं।
  1. आरक्षण के मुद्दे को लालू ने बखूबी भुनाया। मोहन भागवत के बयान के बाद जो सियासी भूचाल खड़ा हुआ उस पर लालू ने राजनीति के ऐसे दांव खेले कि पिछड़ा समाज उनके पक्ष में आ खड़ा हुआ।
  2. जुबानी जंग में भी लालू पीछे नहीं रहे। ‘शैतान’, और ‘ब्रह्मपिशाच’ जैसे विवादों के बावजूद वह जनता को अपने साथ जोड़ पाए। ‘बेटी को सेट’ करने वाले मोदी के बयान को भी उन्होंने अपने पक्ष में भुना लिया।
  1. अपने ठेठ गवंई अंदाज को वह इस बार सोशल मीडिया पर भी ले आए। उनकी रैलियों में काफी भीड़ जुटी जिसे वह वोटों में बदलने में भी कामयाब रहे।
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