अब इस रिपोर्टर का कौन सा ईलाज करेंगे नालंदा एसपी !

Share Button

-: एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क / मुकेश भारतीय :-

रिपोर्टर नीरज से जुड़ा एक अजीबोगरीब मामला बिहार शरीफ व्यवहार न्यायालय में अग्रमि जमानत हेतु विचाराधीन था। हम पुलिस-न्यायालय की कार्रवाई को प्रभावित नहीं करना चाहते थे। जबकि अंदर तक का सच मुझे पता था, जो राजगीर पुलिस-प्रशासन को नंगा करने के लिए काफी थी……………..”

नालंदा एसपी नीलेश कुमार से खुद बात की थी। तब एसपी ने नीरज का नाम सुनते ही बिना बात सुने दो टूक कहा था कि नीरज ने मारपीट किया है। इस तरह के जबाव सुनकर मैं भौंचक था। मुझे समझते देर नहीं लगी कि इस एसपी ने राजगीर थाना में कईयों के बीच जो कहा था कि हम नीरज का होम्योपैथी ईलाज करेंगे। वही सब हो रहा है।

इसके बाद मैंने पटना हाई कोर्ट के अधिवक्ता विश्वनाथ प्रसाद जी से बात की। नीरज और उसके भाईयों की अग्रमि जमानत फाइल कराई। क्योंकि राजगीर थानेदार संतोष कुमार और डीएसपी सोमनाथ प्रसाद उसे किसी भी हालत में पकड़ कर टार्चर करने की जुगत भिड़ाए थे।

कितनी शर्मनाक स्थिति है कि एक तरफ जहां राजगीर थानेदार द्वारा एक रंगदारी-मारपीट के पीड़ित स्कूल संचालक-शिक्षक को तमाचा मारकर भगा देता है, वहीं कतिपय दलालों की शह पर एक रिपोर्टर के खिलाफ रातोरात केस हीं दर्ज नहीं करता, बल्कि उसे पकड़ने के लिए एड़ी चोटी एक कर देता है। रात को बिना महिला पुलिस रिपोर्टर के बीबी-बच्चों के सामने अनाप-शनाब बकता है।

घटना दशहरा के समय की ही है। उसी समय से रिपोर्टर नीरज और उसके भाई भूमिगत चल रहे थे, उस अपराध के लिए जो घटित ही नहीं हुआ था। अगर घटित हुआ था तो इसके लिए राजगीर का शीर्ष पुलिस-प्रशासन के अफसर अधिक दोषी हैं। सीओ-एसडीओ के साथ पुलिस पर सीधी कार्रवाई होनी चाहिए।

राजगीर थाना में भादवि की धारा 341/323/307/379/147/148/149 के तहत दर्ज प्रथमिकी के अनुसार राजगीर कुंड पर निवासी साधु यादव के पुत्र उमेश यादव का आरोप है कि विगत 10.10.2019 को रात्रि करीब 12.30 बजे मां दुर्गा जी की मूर्ति को विसर्जन हेतु बाजार पहुंचा, तभी नीरज कुमार, टिंकु कुमार, मनीष कुमार, तीनों पिता बिरजु यादव आए और “हिन्दुस्तान जिंदावाद-पाकिस्तान मुर्दावाद” गाना बजाने को कहा। इस पर उमेश यादव ने कहा कि वह ऐसा गाना बजने नहीं देगा, क्योंकि यह देशद्रोही मामला है। इस पर उक्त तीनों ने हाथ में लिए लोहे का रड, विकेट, लाठी से मारपीट करना शुरु कर दिया, जब तक बेहोश नहीं हो गया।

उसके बाद वहां मौजूद अन्य लोगों ने उठाकर बैठाया। इसी बीच नीरज गले से सोना की चैन छीन लिया। उसके साथ 10-15 अज्ञात लोग भी आए।

आगे लिखने पहले बता दूं कि फर्जी शिकायतकर्ता उमेश यादव श्री कुंड दुर्गा पूजा के अध्यक्ष और रिपोर्टर नीरज श्री कुंड दुर्गा पूजा के उपाध्यक्ष हैं। नीरज के भाई ने विगत वर्ष उमेश यादव के पुत्र विक्की कुमार पर एक अपराधिक मुकदमा भी दर्ज करा रखा है। राजगीर बबुनी गैंगरेप के बाद एक्सपर्ट मीडिया न्यूज से बौखलाई पुलिस ने उमेश यादव को मोहरा बनाया और उसके जरिए नीरज को फंसाने का एक कुचक्र रचा।

अगर नीरज द्वारा रात के साढ़े बारह बजे डीजे पर “हिन्दुस्तान जिंदावाद-पाकिस्तान मुर्दावाद” गाना बजाने को कहा तो उस समय किस प्रशासनिक अधिकारी के आदेश पर डीजे बज रहा था। क्या इतनी रात को मां दुर्गा की विसर्जन जुलूस जारी थी? अगर जुलूस में मारपीट हुई तो उसमें शामिल पूजा समिति के अन्य लोग कहां थे। पुलिस की टीम कहां थी। क्या सब कुछ भगवान भरोसे छोड़ दिया गया था।

अगर श्री कुंड दुर्गा पूजा के अध्यक्ष उमेश यादव के साथ भरी भीड़ में रड, विकेट, लाठी से बेहोश होने तक पिटाई की गई तो उसका ईलाज कहां हुआ। राजगीर रेफरल अस्पताल में या किसी भी नीजि क्लिनिक में? कहीं तो  उसका मामूली तौर भी ईलाज हुआ होगा।

मीडियाकर्मियों का होम्योपैथी ईलाज करने का जुमला फेंकने वाले नालंदा एसपी नीलेश कुमार से भी जानना चाहूंगा कि अग्रिम जमानत मिलने के पहले 5 बार कोर्ट की मांग पर डायरी क्यों नहीं समर्पित की गई। पिछली तारीख को तो खुद आपके ‘कंपाउंडर’ थानेदार ने कोर्ट में लिखित तौर पर दिया था कि 5 दिन का समय दिया जाए मी लार्ड। फिर भी डायरी क्यों नहीं पेश की गई। जबकि जिस तरह से गंभीर धाराएं लगाई गई थी, उसमें देशद्रोह की धारा भी थी।

दरअसल राजगीर थानेदार और डीएसपी की रिपोर्टर नीरज के साथ निजी खुन्नस है। वनकर्मी उत्पीड़न कांड के बाद डीएसपी सोमनाथ प्रसाद और बबुनी गैंग रेप कांड के बाद वहां के थानेदार संतोष कुमार और उनके चहेते दलालों को। इन दोनों मामलों के खुलासे में रिपोर्टर नीरज की अहम भूमिका रही है। वह अन्य रिपोर्टरों से अलग है। गैंगरेप मामले में तो पुलिस ने हमारे साथ नीरज पर पास्को एक्ट तक लगा दिया था। जिसे कोर्ट ने पहले दिन ही दो टूक न्याय करते हुए खारिज कर राहत दी।

निर्भिकता उसकी पहचान है। पुलिस के भय से कई लोगों ने एक्सपर्ट मीडिया के लिए खुले तौर पर लिखना छोड़ दिया। यदा-कदा कोई लिखता भी है तो इस अनुरोध के साथ कि गोपनीय रखें, क्योंकि पुलिस के आला अफसर भयभीत करते हैं। नीरज खुलकर सामने आता है। इसी से नकारों का दम घुटता है। फिलहाल नीरज और उसके भाइयों को माननीय कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है।

Share Button

Relate Newss:

इस मीडिया गैंग की नई करतूत, प्रशासन को कर रहे यूं बदनाम
दैनिक ‘प्रभात खबर’ में हैं इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े कई संदिग्ध !
नीतीश सरकार ने क्यों की अमीरदास आयोग को भंग
नीतिश के गृह क्षेत्र में नवनिर्वाचित महिला मुखिया की हत्या
कुछ तो शर्म करो 'बाप-राज' के पुलिस वाले
रेंगने को मजबूर क्यों हुआ एन डी टीवी ?
पूर्व शिक्षा मंत्री एवं लेखक-पत्रकार सुरेन्द्र प्रसाद तरुण का निधन
रिश्वत लेते पकड़े गए बी के बंसल की पत्नी-बेटी ने की आत्महत्या
सीएम ने रांची के ओरमांझी में किया देश के सबसे बड़े मछली घर का उद्घाटन
हे मोदी जी! इस कानून को ख़त्म कीजिये, देश मुस्कुरा उठेगा
पांच्यजन्य अखबार के विरुद्ध कार्यवाही क्यों नहीं?
झारखंड सूचना जन संपर्क विभाग में लूट का नया खेल
भला हो रेड क्रॉस की, दुःखी पत्रकार को मरहम लगाया
है कोई इनकी सुध लेने वाला .......
टाडा के भगौड़ा पत्रकार सुरेंद्र सिंह का 21 साल बाद सरेंडर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...
loading...