अडानी पर मोदी सरकार की मेहरबानी, 200 करोड़ हुआ माफ !

Share Button

नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी पोट्रस एंड एसईजेड पर लगा 200 करोड़ रुपए का जुर्माना वापस लेने का फैसला किया है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के आरोप में यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान यह जुर्माना लगाया गया था।

बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी रिपोर्ट के मुताबिक पर्यावरण संबंधित नियमों के उल्‍लंघन के लिए लगाया गया यह सबसे बड़ा जुर्माना था।

खबर के मुताबिक, इसके अलावा भी कंपनी के गुजरात के मुंद्रा स्‍थित वाटरफ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्‍ट को 2009 में पर्यावरण मंत्रालय की ओर से क्‍लीयरेंस मिला था, उसे और बढ़ा दिया गया है। साथ ही, कंपनी को जारी कई नोटिस को भी वापस ले लिया गया है।

यह था मामलाः  यूपीए शासनकाल के दौरान साल 2012 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने मुंदड़ा प्रोजेक्ट से पर्यावरण को हुए नुकसान के आरोपों की जांच के लिए सुनीता नारायण की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को हुए व्यापक नुकसान और अवैध तरीके से जमीन लेने जैसी बातों का खुलासा किया।

जारी हुआ था कारण बताओ नोटिसः समिति ने परियोजना के उत्तरी पोर्ट पर प्रतिबंध लगाने और क्षतिपूर्ति के लिए परियोजना लागत का एक प्रतिशत या 200 करोड़ रुपए जो भी अधिक हो, वसूलने की सिफारिश की थी।

समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए मंत्रालय ने अडानी पोर्ट एंड सेज को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

प्रकाश जावडेकर ने रद्द किया जुर्मानाः हालांकि तत्कालीन यूपीए सरकार में मंत्रियों के फेरबदल (पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन की जगह वीरप्पा मोइली ने ली) कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका था, लेकिन सरकार बदलने के बाद पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने सितंबर 2015 में जुर्माने को रद कर दिया। अब जाकर इस मामले का खुलासा हुआ है।

माना जा रहा है कि पहले से ही अडानी समूह से संबंधों को लेकर विपक्षियों का निशाना रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विपक्ष खासतौर से कांग्रेस और अधिक हमलावर हो सकती है।

Share Button

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.