अजब झारखंड की एक और गजब कथा !

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लूट की ऐसी कहानी बहुत काम देखने सुनने को मिलती है। झारखण्ड में १४ साल के लूटतंत्र को देखेंगे तो भ्रष्टाचारी भी मात खा जाए।

यहाँ ऐसी कोई सरकार नहीं बनी है जिनके हाथ लूटतंत्र में शामिल न हो। मंत्री से संत्री तक इस प्रदेश को लूटते रहे है।

एक ताजा लूट की कहानी सामने आयी है जिसे राजनितिक भ्रष्टाचारी भी बाप बाप चिल्ला रहे है।

एक प्लेसमेंट ऑफिस के जरिये अरबो की लूट की गयी। इस ऑफिस के जरिये ५१४ लड़को से नौकरी दिलाने के लिए पैसे लिए गए। सबको सिपाही या फिर किसी फ़ोर्स में भेजने की बात हुयी।

जब यह काम कराने में प्लेसमेंट वाले सफल नहीं हुए तो राज्य के आला पुलिस अधिकारी से मिलकर योजना बनायी। योजना ये बानी की केंद्र सरकार नक्सली समर्पण के नाम पर काफी धन देती है क्यों नहीं इन नौकरी पाने वाले युवको को नक्सली करार दिया जाए और पैसे की लूट की जाए।

रणनीति बन गयी। रांची के पुराने खाली जेल में चुपके चुपके सभी लड़को को बंद किया गया। कहा गया की उन्हें ट्रेनिंग दी जा रही है।

लड़को को शक नहीं हो इसलिए जेल के भीतर कुछ पुलिस प्रशिक्षकों को भी रख दिया गया और कथित ट्रेनिंग शुरू हो गयी।

प्रशाशन को जब इस बारे में पता चला तो पुलिस अधिकारियों ने यह कह दिया की ये सब नक्सली है और इन्हे आम कैदी से अलग रखा गया है। खेल जारी रहा। पैसे लुटे गए। केंद्र से लेकर राज्य स्तर के पुलिस अधिकारी और एंटी नक्सल से जुड़े अधिकारियो ने अरबो की लूट की।

लेकिन झूठ कब तक छुपता। एक दिन इसका पर्दाफास हुआ और सभी ५१४ लड़के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलने आ पहुंचे।

मुख्यमंत्री और उनके अधिकारी कथा सुनकर दंग रह गए। मुख्यमंत्री ने सभी युवाओं के लिए कुछ योजना तैयार की है।

सी बी आई जांच कराने की बात कही है। केंद्र के दो बड़े अधिकारी अब इस मामले को खत्म करने के लिए दिन रात मुख्यमंत्री के आगे पीछे कर रहे है। लेकिन मुख्यमंत्री जांच के लिए अडिग है। देखे आगे क्या होता है।

…… वरिष्ठ पत्रकार  Akhilesh Akhil अपने फेसबुक वाल पर

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