अच्छी रिपोर्ट के लिए जरुरी है पिचिंग

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किसी रिपोर्ट पर काम शुरू करने से पहले उस बारे में अपने संपादकीय प्रभारी के सामने आइडिया रखना होता है और इस बारे में सहमति के बाद ही रिपोर्टिंग का काम शुरू होता है. अपनी रिपोर्ट के आइडिया के बारे में संपादकीय प्रभारी के साथ मीटिंग करना और उसमें आइडिया को पेश करना एक हुनर है.

mediaअँगरेज़ी में इसे‘पिचिंग’कहते हैं जिसका मतलब है स्टोरी आइडिया को सामने रखना. हर अच्छी स्टोरी की शुरूआत इसी तरह होती है, आप फ्रीलांसर हों या फिर स्टाफ रिपोर्टर आपको स्टोरी आइडिया को मंज़ूर कराना होता है.

कई बार अच्छे स्टोरी आइडिया नामंज़ूर कर दिए जाते हैं, दो बातें बहुत अहम होती हैं, एक तो आपकी मीटिंग और दूसरे स्टोरी आइडिया को पेश करने की आपकी तैयारी.

मीटिंग पर आपका बहुत नियंत्रण नहीं होता मगर आप अपनी तैयारी अच्छी तरह ज़रूर कर सकते हैं. मीटिंग से पहले एडिटर से समय तय कर लेना चाहिए, और बताना चाहिए कि आपको अपनी बात कहने में कितना समय लगेगा.

आपके दिमाग़ में तीन बातें साफ़ होनी चाहिए—स्टोरी क्या है, उसे लोगों तक पहुँचाने का सबसे अच्छा तरीक़ा क्या होगा, और आप इसे कैसे पूरा करेंगे.

ख़ुद से सवाल पूछें कि आपका आइडिया अच्छा क्यों है, क्या आप स्टोरी आइडिया को जिस तरह पेश कर रहे हैं उसमें यह खूबी सामने आ रही है?

बीबीसी के एक वरिष्ठ संपादक पीटर रिपन कहते हैं, “जब आप स्टोरी आइडिया लेकर जाएँ तो इतना बताने से काम नहीं चलेगा कि स्टोरी क्या है, यह भी बताएँ कि उसमें आप क्या करने वाले हैं.”

रेडियो फ़ोर की प्रोड्यूसर सीरिन बैंस कहती हैं, “आप जिन्हें सच समझते हैं उनका उलझा हुआ प्रजेंटेशन आपके आइडिया की हवा निकाल सकता है और आपकी विश्वसनीयता भी ख़तरे में पड़ सकती है, अगर आपके पास पक्के डिटेल्स नहीं हैं लेकिन आपको लगता है कि आइडिया अच्छा है तो यह बात साफ़ कहिए, न उलझिए और न उलझाइए.”

मीटिंग

स्टोरी आइडिया पर आगे काम होगा या नहीं, यह मीटिंग से ही तय होता है इसलिए स्टोरी आइडिया मीटिंग को गंभीरता से लेना चाहिए.

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के एक वरिष्ठ एडिटर एलेस्टर एल्फ़िक कहते हैं, “दूसरों के साथ मिलकर काम करने, लोगों को सोचने का मौक़ा देने, उन्हें अपने विचारों को ही चुनौती देने के लिए उकसाने से, स्टोरी के ट्रीटमेंट पर घुमावदार तरीक़े से सोचने से बात बनती है.”

वे कहते हैं, “इसके बाद स्टोरी के एडिटोरियल और प्रोडक्शन से जुड़े सवालों पर गौर करना चाहिए, लोगों को प्रेरित करना चाहिए वे मुश्किल सवाल पूछें और उनके हल तलाश किए जाएँ. अपने साथ काम करने वाले लोग जब सवाल पूछें तो झल्लाए बग़ैर उन सवालों के बारे में सोचें जिससे आपकी स्टोरी और निखरेगी ही, और कुछ नहीं तो आपकी समझ साफ़ होगी.”

कुछ याद रखने लायक बातें

  • शुरूआती स्टेज पर कोई आइडिया बहुत अच्छा या बहुत बुरा नहीं होता, जितना खुलकर सोच सकते हैं, सोचिए. एक बार आइडिया ठीक लगे तो बाकी सब ठीक किया जा सकता है.
  • दूसरों की बातों को ध्यान से सुनिए, बहस को बंद नहीं करिए बल्कि खुला रखिए, नहीं कहने के बदले हाँ कहिए फिर अपनी परेशानियाँ बताइए
  • आइडिया को आसानी से मत जाने दीजिए, मिलकर काम करिए सहयोग की भावना के साथ, खुद को दूसरे से अक्लमंद साबित करने की कोशिश में चर्चा आगे नहीं बढ़ पाएगी
  • एक छोटे ग्रुप मे अधिक रचनात्मकता चर्चा हो सकती है, एक विचार से दूसरे विचार पैदा होते हैं
  • आइडिया को रद्द करने से पहले उसे आज़माने के लिए होने वाली चर्चा अक्सर बहुत दिलचस्प होती है, वह चर्चा ज़रूर करें

यह सब अपने आप नहीं होगा इसके लिए समय और इरादा चाहिए, कोशिश करिए कि ऐसा हो.

सिर्फ़ अपने स्टोरी आइडिया तक सीमित न रहिए, दूसरों के स्टोरी आइडिया पर भी जितनी हो सके चर्चा करिए जिससे आपको कुछ न कुछ नया सीखने को ही मिलेगा.

अगर आप अपना स्टोरी आइडिया सीधे संपादक के पास ले जाने को लेकर नर्वस हैं तो टीम के किसी ऐसे सीनियर व्यक्ति से बात करिए जिसके अनुभव की आप कद्र करते हों, उनस कहिए कि आपसे आपके आइडिया पर आलोचनात्मक दृष्टि से बात करें, इससे बहुत मदद मिल सकती है.

संक्षेप में

दो-चार स्टोरी आइडिया रद्द होने के बाद अपना आत्मविश्वास मत खोइए, यह आपका रोज़मर्रा का काम है, आपके दिमाग़ में कोई आइडिया आए तो उस समय और ध्यान लगाइए, उसे अच्छी तरह अपने दिमाग़ में तैयार करिए, किसी सीनियर की मदद लीजिए, फिर पेशेवेर तरीक़े से पूरे आत्मविश्वास के साथ पेश करिए. (साभारः बीबीसी)

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