अखिलेश सरकार के लिये बड़ी नसीहत यादव सिंह प्रकरण

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सपा और बसपा के शासनकाल में ही तो यादव सिंह एक साधारण इंजीनियर से अरबपति इंजीनियर बन गया और शायद इसीलिए हाईकोर्ट द्वारा सीबीआई जांच के आदेश की सबसे ज्यादा खलबली भी इन्ही राजनीतिक पार्टियों के भीतरखाने में हो रही है…..

engineer-yadav-singhनोएडा विकास प्राधिकरण के निलंबित अरबपति चीफ इंजीनियर यादव सिंह के मसले पर इलहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सीबीआई जांच के आदेश दे दिए है. कोर्ट ने ये आदेश राज्य सरकार के उस जिद के बाद दिए है जिसमे वो किसी भी सूरत में स्वेच्छा से मामले की सीबीआई जांच कराने को तैयार नहीं थी।

दरअसल यादव सिंह प्रकरण पर कोर्ट का ये आदेश राज्य सरकार को एक तरह नसीहत भी दे गया है. इस प्रकरण पर आया कोर्ट का आदेश राज्य सरकार को यह सन्देश देने के लिए पर्याप्त है कि किसी भी मामले पर व्यतिगत रुख अपनाने से पहले राज्य सरकार ये ध्यान रखें कि अभी राज्य की न्यायिक व्यवस्था जिंदा व सशक्त है।

इतना ही नहीं कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी स्पष्ट तौर पर कहा है कि सीबीआई इस मामले से जुड़े सभी राजनैतिक, गैर राजनैतिक, अधिकारीगण की भी जांच करेगी। यानि एक तरह से कोर्ट ने उन सभी राजनैतिक पार्टियों की पोल जनता के बीच खोलने की स्क्रिप्ट लिख दी है जिनके राजनेता इस महाघोटाले में शामिल है।

कोर्ट ने अपने अपनी टिपण्णी में यह भी कहा कि यादव सिंह प्रकरण को देखने से साफ पता चलता है कि उसे बड़े राजनैतिक आकाओं का सरंक्षण मिला हुआ है। यह बात इअसे और स्पष्ट होती है कि उसके खिलाफ पहले दर्ज एक प्राथमिकी पर सह अभियुक्त के कहने पर जांच किस तरह सीबीसीआईडी को सौंपी गई और मामला सेटल होते ही ना केवल उस केस में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गयी, बल्कि वादी कोर्ट में उस रिपोर्ट को स्वीकार भी कर लिया।

इतना ही नहीं इसके बाद यादव सिंह को नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस वे का चीफ इंजीनियर बना दिया गया, जो प्रथम दृष्टया यह प्रमाणित करता है सत्ताधारियों ने जान-बूझकर यादव सिंह को खुली छूट प्रदान कर रखी थी। इस स्तर पर हम आपको बता दें कि यादव सिंह का शुमार यूपी के उन ताकतवर लोगो में किया जाता रहा है जिनके विषय में ये कहा जाता है कि यूपी में सरकार किसी की भी रही हो चलती इन्ही ताकतवर लोगो की है। इसी ताकत के बलबूते पर यादव सिंह अब तक अखिलेश सरकार की सरपरस्ती पाते रहे रहे है और सिर्फ अखिलेश की ही क्यों, इससे पूर्व की माया सरकार के भी ये सबसे दुलारे अधिकारीयों में से थे।

खैर किसी भी भ्रष्ट अधिकारी का दुलार सरकारें कर सकती है कोर्ट नहीं। कोर्ट स्वतंत्र संवैधानिक व्यवस्था जिसका काम है विधिसंगत तरीके से आरोपी को उसकी सही जगह पहुंचाना। यही काम यादव सिंह प्रकरण पर सम्मानित न्यापालिका ने किया। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि उसे राज्य सरकार की जांच एजेंसी की जांच पर यकीन नहीं है। ये मामला इतना गंभीर है कि बिना सीबीआई जांच के सच सामने नहीं आयेगा।

खैर अब जबकि सीबीआई जांच के आदेश हो चुके तो जल्द ही मामले की परत दर परत भी खुलना शुरू हो जायेगी जिसके दायरे सबसे ज्यादा दो राजनीतिक पार्टियां ही आयेगी। एक सपा और दूसरी बसपा। और आये भी क्यों ना, इन दोनों पार्टियों के शासन में ही तो यादव सिंह एक साधारण इंजीनियर से अरबपति इंजीनियर बन गया और शायद इसीलिए इस आदेश से सबसे ज्यादा खलबली भी इन्ही राजनीतिक पार्टियों के भीतरखाने में हो रही है।

दरअसल यादव सिंह प्रकरण पर कोर्ट का ये आदेश राज्य सरकार को एक तरह नसीहत भी दे गया है. इस प्रकरण पर आया कोर्ट का आदेश राज्य सरकार को यह सन्देश देने के लिए पर्याप्त है कि किसी भी मामले पर व्यतिगत रुख अपनाने से पहले राज्य सरकार ये ध्यान रखें कि अभी राज्य की न्यायिक व्यवस्था जिंदा व सशक्त है।

हालांकि उपरोक्त नसीहत के बावजूद राज्य सरकार अपने ही लय में चलेगी क्योकि वो सत्ता में है और सत्ता का नशा कुछ इस तरह चढ़ता है कि वो सत्ता में बैठे प्रत्येक व्यक्ति को धृतराष्ट्र बना देता है जो सब कुछ जानने के बावजूद सिर्फ अंधा ही बना रहता है।

……..अनुराग मिश्र, स्वतंत्र पत्रकार।

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