अखबारों-टीवी चैनलों के लिए टर्निंग पॉइंट है बिहार चुनाव

Share Button
Read Time:4 Minute, 55 Second


‘हिंदी के बड़े तुरर्म खां अखबारों के लिए राजनैतिक मोर्चे पर स्थाई तौर पर सूखा बन गया है। मीडिया के मालिकों को भाजपा से कमाई की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। और जब सत्तारूढ़ पार्टी सूखा रखेगी तो विरोधी पार्टियों से तो वैसे ही कुछ नहीं मिलना है।’ विस्तार से पढ़िए हिंदी दैनिक अखबार नया इंडिया के वरिष्ठ पत्रकार व संपादक हरिशंकर व्यास का विश्लेषण…...

hari-shankarनरेंद्र मोदी और अमित शाह न केवल भारत की राजनीति, चुनाव लड़ने के तौर-तरीकों को बदल दे रहे हैं बल्कि मीडिया को आटे-दाल का भाव मालूम करा दे रहे हैं। बिहार का चुनाव हिंदी-अंग्रेजी अखबारों, टीवी चैनलों के लिए टर्निंग पॉइंट है।

संदेह नहीं कि चुनाव वह मौका होता है जब मीडिया घराने, अखबार, चैनल राजनैतिक पार्टियों और उम्मीदवारों से दो नंबर की कमाई करते हैं। एक हिसाब से यह इनके अस्तित्व के लिए जरूरी भी हो गया है।

मंदी और लागत के आज के संकट में चुनाव के वक्त राजनैतिक विज्ञापन से बड़े अखबारों का, लालाओं का खजाना बनता है तो मझोले और छोटों के लिए साल-दो साल का राशन पानी जुटता है।

तभी बिहार में ठीक चुनाव से पहले कई टीवी चैनल पहुंच गए। मालिकों ने सोचा पार्टियां विज्ञापन देंगी। लेकिन नई चैनलों की बात तो दूर प्रदेश के पुराने चैनल और स्थापित बड़े अखबारों को भी लाला पड़ा हुआ है।

भाजपा ने दो टूक अंदाज में फैसला किया है कि न दो नंबर में पैसा दिया जाएगा और न रेटकार्ड में पोलिटिकल प्रचार की एक्स्ट्रा विज्ञापन रेट अनुसार अखबारों को कमाई करने दी जाएगी। भाजपा का स्टैंड है कि यदि हम नेताओं का कहा अखबार नहीं छापते हैं और उसके लिए भी पैसा चाहते हैं तो हमें यह मंजूर नहीं। इसलिए जो करोड़ों करोड़ का पैकेज बनता था वह बिहार चुनाव में खत्म हो गया है।

ऐसा ही नीतीश कुमार-लालू यादव–कांग्रेस के महागठबंधन ने भी किया है। जो नंबर एक चैनल है उसको भी डीएवीपी-रेटकार्ड अनुसार विज्ञापन गया है तो हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण, भास्कर भी इसी नीति में विज्ञापन पा रहे हैं। नीतीश कुमार के महागठबंधन ने तो और भी गजब किया है। यह विज्ञापन नहीं के बराबर रिलीज कर रहा है।

इसका अर्थ यह नहीं कि मीडिया मैनेज नहीं है। सब मालिक लाइन लगा कर खड़े हैं। हवा बना-बिगाड़ रहे हैं। और तो और मालिक लेने के बजाय चंदा देने की नीति अपना जान छुड़ाने में भला समझ रहे हैं। सचमुच बिहार के इस चुनाव को मीडिया के मालिक लाला लोग शायद ही भुला पाएं।

अखबार में एकतरफा खबरें मिलेंगी लेकिन उनकी पत्रकार टीम दिल्ली से आए पत्रकारों के बीच उलटी हवा बनाते मिलेंगे। अपने को तो यह भी सूचना है कि एनडीए और महागठबंधन दोनों तरफ यह मैसेज आया गया कि मीडिया मालिकों को पैसा देने की कोई जरूरत नहीं है। इन पर पैसा जाया करना फालतू है।

फिर महागठबंधन तो इसलिए भी नाराज है कि नीतीश कुमार के राज में अखबारों ने सरकार से विज्ञापन अरबों के लिए और अब नीतीश कुमार के यहां यह कहला दिया गया है कि फला पैकेज लेंगे तो खबर छपेगी।

जो हो, पते की बात है कि हिंदी के बड़े तुरर्म खां अखबारों के लिए राजनैतिक मोर्चे पर स्थाई तौर पर सूखा बन गया है। मीडिया के मालिकों को भाजपा से कमाई की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। और जब सत्तारूढ़ पार्टी सूखा रखेगी तो विरोधी पार्टियों से तो वैसे ही कुछ नहीं मिलना है।

0 0
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Share Button

Relate Newss:

राघोपुर के बाहुबली लोजपा नेता बृजनाथी सिंह को AK-47 से भून डाला
हिन्दी के ही एफएम चैनल कर रहे हैं हिन्दी का बेड़ा गर्क :राहुल देव
स्थानीय नीति और सीएनटी एक्ट में बदलाव स्वीकार्य नहीं
फिल्म 'पीके' का विरोध करने वाले घटिया लोग
‘आप’ से देश की अर्थव्यवस्था को खतरा
आरक्षित वर्गो के गले की हड्डी ना बन जाये यह निर्णय
दैनिक हिन्दुस्तान ने किसान का करा दिया हवा में पोस्टमार्टम!
जरुरी है जबरिया भूमि अधिग्रहण बंद करना
कुख्यात टुल्लू सिंह ने फेसबुक पर जेल से डाली अंदर की तस्वीरें
बेउर जेल में बंद कुख्यात रीतलाल के घर पहुंचे लालू
मुंडा’काज हो या ‘रघु’राज, नहीं बदल रहे वन विभाग के भ्रष्ट'साज !
डॉ. ऋता शुक्ला, डॉ.महुआ मांजी समेत 14साहित्यकार होंगे सम्मानित
अरविंद बिष्ट जी से यह उम्मीद न थी !
भाजपा के नये मुसीबत बने उपेंद्र कुशवाहा !
ऐसी नौटंकी से क्या दूर होगा बाल विवाह और दहेज की कुप्रथा !
बिहार में बच्चों की मौत पर रिपोर्टिंग करती टीवी पत्रकारिता को टेटनस हो गया है, टेटभैक का इंजेक्शन भी...
पढ़ियेः बरिष्ठ पत्रकार कृष्ण बिहारी मिश्र का क्या था फेसबुक पोस्ट, जिस पर हुआ FIR
नीतिश जी देखिये, अपने चहेतों के भ्रष्ट्राचार का उड़ता स्टेडियम !
काटजू जी की 'कोर्ट' से दीपक चौरसिया गेटआउट
नही तो मीडिया को खारिज कर देगी जनता !
आरएसएस,जनसंघ और भाजपा को खून-पसीने से सींचा, आज सुध लेने वाला कोई नहीं !
बीमार पत्रकार की सुध लेने पहुंचे अर्जुन मुंडा, दिया हरसंभव भरोसा
सिल्ली विधायक ने सोशल मीडिया पर दिखाया सीएम को भ्रष्टाचार का आयना
सुर्खियों में हैं बिहार कैडर के IPS अमित लोढा की पुस्तक ‘बिहार डायरीज’
MP सीएम की गुंडागर्दी, वीडियो ब्लॉगर को बिना FIR रात अंधेरे उठवाया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...