अंततः सरायकेला पुलिस ने पत्रकार वीरेंद्र मंडल को जेल में डाल ही दिया !

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राजनामा.कॉम। झारखंड के सरायकेला जिले में चर्चित राजनगर थाना क्षेत्र के महिला मुखिया-पत्रकार मामले में आज पुलिस ने अंधी कार्रवाई करते हुए पत्रकार वीरेन्द्र मंडल को उनके पिता के साथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

वीरेन्द्र मंडल घर का अकेले कमाऊ पूत हैं। पुलिस द्वारा उन्हें अचानक दबोच कर जेल भेज देने से उनके मासूम परिवार सदमें में है। हमारी राजनामा टीम के पास जो साक्ष्य उपलब्ध हैं, उस आलोक में पुलिस की यह कार्रवाई पक्षपातपूर्ण और एकतरफा है। इसमें स्थानीय स्तर के 2-3 पत्रकारों की भी भूमिका काफी संदिग्घ उभरकर सामने आई है।

पुलिस अत्याचार से शोकाकुल पत्रकार वीरेन्द्र मंडल की मां, पत्नी और बच्चे…

पत्रकार वीरेंद्र मंडल पर एक महिला मुखिया ने छेड़खानी और जाति सूचक गालियां देने को लेकर थाना में एसटी-एससी के तहत मामला दर्ज कराया था। जबकि पत्रकार योजनाओं में गड़बड़ी को लेकर मुखिया और ग्रामीण के बीच उत्पन्न विवाद को कवरेज करने पहुंचा था। इसी बीच सारे मामले की रिकार्डिंग कर रहे पत्रकार से मुखिया और उसके समर्थक भिड़ गए और मारपीट करने लगे।

इसके बाद घटना के बाद करीब साढ़े दस बजे पत्रकार ने थाना में लिखित शिकायत की और मुखिया व उसके समर्थकों द्वारा मारपीट करते वीडियो क्लीप भी सौंपे। इसके बाद पत्रकार पर दबाव बनाने के लिए देर शाम मुखिया द्वारा भी एक मामला दर्ज करा दिया गया। पत्रकार ने इसके पहले मुखिया के भ्रष्टाचार को भी उजागर किया था।

इसके बाद पुलिस की निष्क्रियता, लापरवाही और बदले की भावना में आकर उल्टी कार्रवाई के विरोध में सीएमओ को पत्र लिखा। उसके बाद सीएमओ ने कोल्हान डीआईजी को जांच के निर्देश दिए। लेकिन उस पत्र के आलोक में उन्हीं पुलिस अफसरों ने जांच-कार्रवाई की, जो हर हाल में पत्रकार को फंसाना चाह रहे थे।

इसका एक बड़ा कारण माना जाता है कि पीड़ित पत्रकार को पिछली बार पुलिस ने पांच दिनों तक राजनगर थाना हाजत में रखकर ही बुरी तरह से प्रताड़ित किया था। जिस पर मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए पुलिस को 2 लाख रुपए दंड राशि देने का आदेश दिया था। इधर राजनगर थाना क्षेत्र में कस्तूरबा आवासीय विद्यालय की एक नाबालिग छात्रा की जबरिया शादी के मामला उजागर होने के बाद पुलिस अपना आपा खोते नजर आई।

बहरहाल, पत्रकार विरेंद्र मंडल के निर्दोष होते हुए भी जेल चले जाने से उसके परिवार पर दुःखों का पहाड़ टूट गया है और इतना तय है कि उनकी आह से न पुलिस वाले बचेगें और न ही षडयंत्रकारी कथित दलाल टाईप के पत्रकार लोग, जिनकी एक ही मुहिम होती है कि उनके दलाली क्षेत्र में कोई आम जन की आवाज न बने।  

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