अंततः मोदी सरकार ने SC को सौंपे तीन सीलबंद लिफाफे

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अंततः केंद्र सरकार ने आज काला धन मामले में विदेशी खाताधारकों की पूरी लिस्‍ट सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी।

कहा जा रहा है कि इस लिस्‍ट में 627 लोगों के नाम हैं। इनमें से आधे भारतीय और आधे एनआरआई हैं।

एनआरआई भारतीय आयकर कानून के दायरे में नहीं आते। इसका मतलब यह हुआ कि इन खातेदारों की जांच नहीं की जा सकेगी।

सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने तीन सीलबंद लिफाफे सौंपे। जिनमें से एक में काला धन मामले में अभी तक हुई जांच की स्‍टेटस रिपोर्ट थी।

एच.एल. दत्‍तू की अध्‍यक्षता वाली पीठ ने लिफाफे खोलने से इनकार करते हुए इसे तत्‍काल एसआईटी के हवाले कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने लिफाफे में सौंपे गए खातेदारों के मामलों की शुरुआती जांच मार्च 2015 तक पूरी करने का निर्देश दिया।

एसआईटी करेगी जांच

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि काला धन मामले पर आगे क्‍या कार्रवाई करनी है, इसका फैसला एसआईटी द्वारा किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘एसआईटी हमारा अंग है और हमें उस पर भरोसा है। उसके अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ही खाताधारकों के नामों वाला सीलबंद लिफाफा खोल सकते हैं।’

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को निर्देश दिया कि वह मार्च 2015 तक काला धन मामले में अपनी शुरुआती जांच पूरी करे।

सरकार ने सौंपे तीन सीलबंद लिफाफे

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कालाधन मामले में तीन सीलबंद लिफाफे सौंपे। पहले में विदेशी खाताधारकों के नाम थे।

दूसरे में दूसरे देशों के साथ हुई संधि के कागजात थे और तीसरे में जांच की स्टेटस रिपोर्ट थी।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इसमें साल 2006 तक की एंट्री है। इसकी वजह यह है कि स्विस अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि ये इनपुट्स चोरी की जानकारी के आधार पर हासिल किए गए हैं।

अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने बताया कि खाताधारकों के नामों के साथ इन लोगों के खिलाफ अब तक हुई जांच की स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल की जा रही है।

सूत्रों का कहना है कि लिस्ट में एचएसबीसी बैंक के जिनेवा ब्रांच में खाता रखने वाले भारतीयों के नाम हैं, जो भारत सरकार को फ्रांस सरकार की ओर से मिले थे। (एजेंसी)

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